korba सनातन धर्म मं भगवान जगन्नाथ के रथ यात्रा के विशेष महत्व बताए गे हे। हर साल आषाढ़ महीना के शुक्ल पक्ष के द्वितीया तिथि मं रथ यात्रा के पर्व मनाय जाथे, जेला रथ द्वितीया घलो कहे जाथे। ए दिन भगवान जगन्नाथ, बड़े भैया बलभद्र अऊ बहिनी सुभद्रा अपन रथ मं सवार होके नगर भ्रमण बर निकलथें। ए दृश्य देखे बर लाखों श्रद्धालु बेसब्री ले इंतजार करथें।
साल 2026 मं रथ द्वितीया के पर्व 16 जून 2026, मंगलवार के दिन मनाय जाही। ए दिन देशभर के जगन्नाथ मंदिर मन मं विशेष पूजा-अर्चना होही, जबकि ओडिशा के पुरी मं निकलइया रथ यात्रा दुनिया भर के श्रद्धालु मन बर आकर्षण के केंद्र रहिथे।
का हे रथ यात्रा के धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपन बड़े भैया बलभद्र अऊ बहिनी सुभद्रा संग श्रीमंदिर ले निकलके गुंडीचा मंदिर जाथें। ए यात्रा भगवान के अपन भक्त मन के बीच पहुंचने के प्रतीक माने जाथे।
ऐसा कहे जाथे कि रथ यात्रा के दर्शन मात्र ले घलो पुण्य के प्राप्ति होथे अऊ मनखे के जीवन मं सुख-समृद्धि आवत हे। जेन भक्त श्रद्धा भाव ले भगवान के रथ के दर्शन करथें, ओमन ऊपर भगवान जगन्नाथ के विशेष कृपा बने रहिथे।
पुरी के रथ यात्रा काबर हे दुनिया भर मं प्रसिद्ध?
ओडिशा के पुरी मं निकलइया रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव मन मं एक माने जाथे। ए यात्रा मं भगवान जगन्नाथ, बलभद्र अऊ माता सुभद्रा बर अलग-अलग विशाल रथ बनाय जाथे।
हजारों कारीगर महीनों पहिली ले लकड़ी के विशाल रथ बनाय के काम शुरू कर देथें। यात्रा के दिन लाखों श्रद्धालु रस्सी पकड़के भगवान के रथ ला खींचथें, जेला बेहद शुभ माने जाथे।
रथ यात्रा के दिन का करना शुभ माने जाथे?
- भगवान जगन्नाथ, बलभद्र अऊ सुभद्रा के पूजा करना।
- घर मं भगवान के भोग मं खीर, मालपुआ अऊ फल अर्पित करना।
- रथ यात्रा के दर्शन करना या ऑनलाइन दर्शन करना।
- गरीब अऊ जरूरतमंद मन ला दान देना।
- भगवान जगन्नाथ के नाम के भजन-कीर्तन करना।
ए दिन दान-पुण्य के घलो हे विशेष महत्व
ज्योतिष अऊ धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ द्वितीया के दिन दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माने जाथे। जरूरतमंद मन ला अन्न, कपड़ा या आर्थिक सहायता देय ले पुण्य के प्राप्ति होथे अऊ जीवन मं सकारात्मकता बढ़थे।
भक्तिमय माहौल मं डूब जाथे पूरा देश
रथ यात्रा के अवसर मं देश के कई शहर अऊ गांव मं शोभायात्रा निकाले जाथे। मंदिर मन ला रंग-बिरंगी रोशनी अऊ फूल ले सजाय जाथे। भगवान जगन्नाथ के जयकारा अऊ भजन-कीर्तन ले पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाथे।
रथ द्वितीया केवल एक पर्व नइ, बल्कि भगवान अऊ भक्त के बीच प्रेम, आस्था अऊ समर्पण के अद्भुत प्रतीक माने जाथे। ए दिन श्रद्धा भाव ले भगवान के स्मरण करना अऊ रथ यात्रा के दर्शन करना बेहद शुभ माने जाथे।
