केंद्र सरकार ने विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-GRAM जी की शुरुआत के साथ राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी की। जानिए शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा, मजदूरी दरों में कितना बढ़ा इजाफा और मनरेगा की जगह नई योजना से ग्रामीण भारत को क्या लाभ मिलेगा।
विकसित भारत–जी राम जी’ की देशभर में सफल शुरुआत: केंद्र ने राज्यों को ₹25,863 करोड़ जारी किए, अब हर श्रमिक को मिलेगा कम से कम ₹300 प्रतिदिन
नई दिल्ली, 5 जुलाई 2026। ग्रामीण भारत को रोजगार, सम्मानजनक मजदूरी और टिकाऊ विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-GRAM जी] के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त (मदर सैंक्शन) जारी कर दी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए यह घोषणा की।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य था कि 1 जुलाई 2026 से यह नई ग्रामीण रोजगार योजना पूरे देश में बिना किसी व्यवधान के लागू हो और यह लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा से विकसित भारत–जी राम जी में बदलाव पूरी तरह सहज और व्यवस्थित रहा, जिससे कहीं भी तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई।
ग्रामीण श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा पर सरकार का विशेष फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि गरीब मजदूर भाई-बहनों की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। सरकार की प्राथमिकता केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण श्रमिकों को सम्मानजनक कार्य, समय पर मजदूरी और गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित करना भी है।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने का माध्यम बनेगी।
एक दिन में पूरे देश में लागू हुई नई योजना
बैठक के दौरान मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मनरेगा को पूरे देश में लागू होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगा था, जबकि विकसित भारत–जी राम जी योजना एक ही दिन में पूरे देश में लागू कर दी गई।
उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, राज्यों के सहयोग और देश की प्रशासनिक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह सुशासन, बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्यशैली का परिणाम है।
पहले सप्ताह में लाखों ग्रामीणों को मिला रोजगार
योजना के पहले सप्ताह की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर की बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में विकास कार्य शुरू हो चुके हैं और लाखों ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।
उन्होंने विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, केरल और राजस्थान की सराहना करते हुए कहा कि इन राज्यों ने पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया। वहीं ओडिशा और पश्चिम बंगाल से शेष ग्राम पंचायतों में जल्द से जल्द कार्य प्रारंभ करने का आग्रह किया गया।
इसके अलावा झारखंड सरकार से योजना को शीघ्र अधिसूचित कर आवश्यक बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने की अपील की गई। जिन राज्यों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से संबंधित खाते खोलने या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं लंबित हैं, उन्हें भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
मजदूरी में बढ़ोतरी, अब ₹300 से कम नहीं मिलेगा भुगतान
ग्रामीण श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विकसित भारत–जी राम जी योजना के तहत मजदूरी दरों में औसतन लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
अब देश के किसी भी राज्य में इस योजना के अंतर्गत ₹300 प्रतिदिन से कम मजदूरी नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ाने, उनकी सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राज्यों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी
योजना के प्रभावी संचालन के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹25,863 करोड़ की पहली किस्त जारी की है।
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह राशि राज्यों की मांग के आधार पर जारी की गई है ताकि किसी भी श्रमिक को मजदूरी भुगतान में देरी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने सभी राज्य सरकारों से भी आग्रह किया कि वे अपनी हिस्सेदारी की राशि समय पर जारी करें ताकि प्रत्येक पात्र श्रमिक को 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
धन की कमी नहीं आने दी जाएगी
मंत्री ने भरोसा दिलाया कि विकसित भारत–जी राम जी योजना के संचालन में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी राज्यों की आवश्यकता और मांग के अनुसार समय-समय पर अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
साथ ही उन्होंने ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों से स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों का चयन करने की अपील की ताकि गांवों का समग्र, सहभागी और टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके।
तकनीक के जरिए पारदर्शिता पर जोर
बैठक के दौरान योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि Face Authentication, Geo-Tagging और अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, फर्जीवाड़े या अनियमितता के लिए कोई स्थान नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्तियों का निर्माण और प्रत्येक रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
राज्यों की मदद के लिए नियुक्त किए गए Area Officers
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में Area Officers की नियुक्ति की है।
ये अधिकारी राज्यों के साथ नियमित संवाद बनाए रखेंगे, जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान करेंगे और योजना के प्रभावी संचालन की लगातार निगरानी करेंगे।
केंद्र और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारी
अपने संबोधन के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि समय पर मजदूरी भुगतान केवल केंद्र सरकार की नहीं बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पहली किस्त समय पर जारी कर दी है। अब राज्यों से अपेक्षा है कि वे भी अपनी वित्तीय हिस्सेदारी समय पर जारी करें, जिससे प्रत्येक पात्र श्रमिक को निर्धारित समय सीमा के भीतर मजदूरी प्राप्त हो सके।
बैठक में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल, संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या है इस पहल का व्यापक महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत–जी राम जी योजना ग्रामीण रोजगार के साथ-साथ गांवों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति दे सकती है। न्यूनतम ₹300 दैनिक मजदूरी, समयबद्ध भुगतान, तकनीक आधारित निगरानी और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी जैसे प्रावधान यदि प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले महीनों में इसका वास्तविक प्रभाव राज्यों में इसके क्रियान्वयन की गुणवत्ता और समयबद्धता पर निर्भर करेगा।
