नई दिल्ली/चेन्नई। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तमिलनाडु सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को चेन्नई के एग्मोर स्थित राजारथिनम स्टेडियम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान ‘सिंगप्पेन स्पेशल फोर्स’ (Singappen Special Force) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए राज्य में ड्रोन आधारित गश्त (Drone Patrol System) शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था पूरे देश में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला या बच्ची की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का लक्ष्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराधों को पहले ही रोकना है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति केवल उसके आर्थिक विकास, उद्योगों या बुनियादी ढांचे से नहीं मापी जा सकती। किसी राज्य की वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि वहां महिलाएं और बच्चे कितने सुरक्षित महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और जागरूकता की भी परीक्षा हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जो कोई भी महिलाओं की सुरक्षा को बाधित करेगा, उसके खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में तेजी से चार्जशीट दाखिल की जाएगी ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से दंडित न किया जाए।”
अपराध रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार के अनुसार, सिंगप्पेन स्पेशल फोर्स का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम करना होगा। यह फोर्स विशेष रूप से उन मामलों पर नजर रखेगी जिनमें महिलाओं को लगातार परेशान किया जाता है या उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित महसूस कराया जाता है।
फोर्स की जिम्मेदारियों में शामिल होंगे—
- महिलाओं का पीछा करना (स्टॉकिंग)
- यौन उत्पीड़न की घटनाएं
- सार्वजनिक स्थानों और बसों में छेड़छाड़
- महिलाओं को बार-बार निशाना बनाने वाले अपराधी
- मानव तस्करी और तस्करी के प्रयास
- ऑनलाइन और ऑफलाइन उत्पीड़न
- महिलाओं के खिलाफ अन्य संगठित अपराध
सरकार का मानना है कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय यदि पहले से निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था मजबूत की जाए तो अपराध दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
पहली बार ड्रोन आधारित गश्त
तमिलनाडु सरकार की इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली है। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, शैक्षणिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा और पुलिस को समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। इससे महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का माहौल और अधिक मजबूत होगा।
354 करोड़ रुपये से अधिक का बजट
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के लिए 354 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है। इस बजट का उपयोग आधुनिक तकनीकी संसाधनों, विशेष वाहनों, निगरानी उपकरणों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर किया जाएगा।
दूसरे चरण में इस विशेष फोर्स के लिए 2,500 नए पदों का सृजन किया जाएगा। इन पदों पर नियुक्त होने वाले कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
ड्रग नेटवर्क पर भी सरकार की सख्ती
मुख्यमंत्री विजय ने अपने संबोधन में महिलाओं के खिलाफ अपराधों और ड्रग तस्करी के बीच संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई अपराधों के पीछे नशीले पदार्थों का नेटवर्क भी जिम्मेदार होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए भी सख्त कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य एक सुरक्षित और अपराध-मुक्त समाज का निर्माण करना है।
महिलाओं के लिए सुरक्षित भविष्य की दिशा में कदम
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने तमिलनाडु सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक, विशेष सुरक्षा बल और त्वरित न्याय व्यवस्था के संयोजन से महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
सिंगप्पेन स्पेशल फोर्स केवल एक नई पुलिस इकाई नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में अन्य राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की दिशा में तमिलनाडु सरकार का यह कदम देशभर में एक नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
