कोरबा, । छत्तीसगढ़ के ऊर्जा नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले कोरबा जिले में प्रस्तावित नए कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। जिले के कोरकोमा, केरवां और आसपास के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा ग्राम सभा आयोजित करने के लिए जारी आदेश का विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला उत्खनन से उनके गांव, जंगल, जल स्रोत, खेती की जमीन और पारंपरिक आस्था स्थल गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के साथ-साथ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर ग्राम सभा आयोजन संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
ग्राम पंचायतों में शुरू हुई प्रारंभिक प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की कमर्शियल माइनिंग नीति के तहत देशभर में कोल ब्लॉकों की नीलामी की गई है। इसी क्रम में कोरबा जिले के रजगामार डीप साइड फुलकडीह नाला कोल ब्लॉक का आवंटन दिल्ली स्थित मेसर्स मिवान स्टील लिमिटेड को किया गया है।
कंपनी को कोयला उत्खनन शुरू करने से पहले विभिन्न वैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसी कड़ी में एफएआर (Forest Rights Act Related Process) के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा आयोजित किए जाने की तैयारी शुरू की गई है।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा तहसीलदार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जैसे ही यह आदेश संबंधित गांवों तक पहुंचा, ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया।
सरपंचों के नेतृत्व में ग्रामीण पहुंचे कलेक्ट्रेट
ग्राम पंचायत कोरकोमा और केरवां के सरपंचों के नेतृत्व में ग्रामीण बड़ी संख्या में जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट कहा कि ग्राम सभा आयोजित करने की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खनन परियोजना से उनके जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि प्रशासन और कंपनी स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज कर आगे बढ़ रही है।
जलस्तर गिरने और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन कार्य जमीन से लगभग 400 मीटर नीचे किया जाएगा। भले ही यह भूमिगत खनन हो, लेकिन इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार खनन शुरू होने से भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है। क्षेत्र के जल स्रोत सूखने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे खेती-किसानी और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होगी।
इसके अलावा ग्रामीणों ने जंगलों के नुकसान और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही होती है और खनन गतिविधियों से उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित होगा।
देवस्थल और पारंपरिक आस्था पर भी संकट
ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक क्षेत्र के आसपास कई पारंपरिक पूजा स्थल, देवगुड़ी और धार्मिक आस्था से जुड़े स्थान मौजूद हैं। खनन परियोजना से इन स्थलों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा और पहचान का हिस्सा हैं। इसलिए वे किसी भी कीमत पर इनके विनाश को स्वीकार नहीं करेंगे।
636 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है कोल ब्लॉक
मिली जानकारी के अनुसार रजगामार डीप साइड फुलकडीह नाला कोल ब्लॉक का विस्तार लगभग 636.82 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है। इस परियोजना के दायरे में रजगामार, कोरकोमा, केराकछार, केरवां तथा केरवां के आश्रित ग्राम ढेंगूरडीह शामिल हैं।
भूवैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में जी-8 ग्रेड का उच्च गुणवत्ता वाला कोयला उपलब्ध है। अनुमान है कि यहां करीब 72.46 मिलियन टन कोयला भंडार मौजूद है, जिसे व्यावसायिक खनन के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
पहले से मौजूद है एसईसीएल की भूमिगत खदान
विशेष बात यह है कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक क्षेत्र के एक हिस्से में पहले से ही एसईसीएल (South Eastern Coalfields Limited) की रजगामार भूमिगत खदान संचालित हो रही है। इसके बावजूद नए कोल ब्लॉक के विस्तार को लेकर ग्रामीणों में आशंकाएं बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों में खनन गतिविधियों के कारण कई क्षेत्रों में पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव देखने को मिले हैं। इसी अनुभव के आधार पर वे नई परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया और जबरन ग्राम सभा या खनन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से ज्ञापन प्राप्त कर मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की चिंताओं को किस प्रकार संबोधित करता है और प्रस्तावित कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
