नई दिल्ली। देश की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि जल्द ही देश के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों में सात से आठ स्थानों पर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ पायलट परियोजना शुरू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
त्रिपुरा के लंकामुरा सीमा चौकी में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ के जरिए देश के सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश
अमित शाह ने कहा कि चाहे त्रिपुरा हो, पश्चिम बंगाल हो या बिहार, केंद्र सरकार की प्राथमिकता सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी सीमा सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जो आधुनिक तकनीक की मदद से हर प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल निगरानी रख सके। इसके लिए स्मार्ट बॉर्डर परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
क्या है स्मार्ट बॉर्डर परियोजना?
स्मार्ट बॉर्डर परियोजना के तहत आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक सेंसर, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, रडार सिस्टम, ड्रोन निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण जैसी सुविधाओं को शामिल किया जा सकता है।
इस परियोजना का उद्देश्य सीमा सुरक्षा बलों को अधिक सक्षम बनाना और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी को चौबीसों घंटे प्रभावी बनाए रखना है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
गृह मंत्री ने बताया कि इस परियोजना की रूपरेखा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और शुरुआती स्तर पर आने वाली चुनौतियों को दूर करने के बाद इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर पुरानी बाड़ बदलेगी
अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूद 15 वर्ष से अधिक पुरानी बाड़ को बदलने की मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि लगभग 650 किलोमीटर लंबी सीमा में से 119 किलोमीटर क्षेत्र में लगी पुरानी बाड़ को नई और अधिक मजबूत सुरक्षा संरचना से प्रतिस्थापित किया जाएगा। इससे सीमा निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ रही हैं नई चुनौतियां
गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक घुसपैठ के अलावा अब मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी और ड्रोन के माध्यम से अवैध गतिविधियों को अंजाम देने जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को इन बदलती चुनौतियों के अनुरूप खुद को लगातार अपडेट करना होगा। इसी सोच के तहत स्मार्ट बॉर्डर परियोजना को विकसित किया जा रहा है, ताकि तकनीक और मानव संसाधन के बेहतर संयोजन से सीमा सुरक्षा को नई ऊंचाई मिल सके।
बीएसएफ जवानों की भूमिका की सराहना
अमित शाह ने सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों के समर्पण और साहस की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में बीएसएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद जवान लगातार राष्ट्र की सुरक्षा में जुटे हुए हैं।
उन्होंने जवानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा से जुड़े संसाधनों और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं पर बढ़ा फोकस
गृह मंत्री की यह यात्रा राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद हुई है। इससे संकेत मिलते हैं कि केंद्र सरकार पश्चिमी और पूर्वी दोनों सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, अमित शाह आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों का भी दौरा कर सकते हैं, जहां सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट बॉर्डर परियोजना के लागू होने के बाद भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
केंद्र सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक स्तर पर सीमा सुरक्षा में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में स्मार्ट बॉर्डर परियोजना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
देश की सीमाओं को सुरक्षित, आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह पहल आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर सकती है।
