नई दिल्ली, 1 जून 2026। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षा परिणाम प्रक्रिया और री-इवैल्यूएशन फीस को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को सीबीएसई पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों से अपनी ही उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच करवाने के लिए भारी शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि कई मामलों में त्रुटियां स्वयं मूल्यांकन प्रक्रिया में होती हैं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा, “जेबकतरों से सावधान रहें, आज वे सीबीएसई के अंदर बैठे हैं।” उनके इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
छात्रों पर आर्थिक बोझ का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी छात्र को अपने प्राप्त अंकों पर संदेह हो और वह उत्तर पुस्तिका की जांच करवाना चाहे, तो उसे अलग-अलग चरणों में शुल्क देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए प्रति विषय 100 रुपये, री-टोटलिंग के लिए प्रति पेपर 100 रुपये और री-इवैल्यूएशन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये का शुल्क लिया जाता है।
उनका दावा है कि यदि कोई छात्र पूरी प्रक्रिया अपनाता है तो उसे लगभग 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब गलती मूल्यांकन प्रक्रिया में होती है, तब उसकी कीमत छात्रों और उनके परिवारों को क्यों चुकानी पड़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में करीब चार लाख छात्रों द्वारा विभिन्न प्रकार के पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना संबंधी आवेदन किए गए हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस प्रक्रिया से सीबीएसई को कुल कितना राजस्व प्राप्त हो रहा है।
‘गलती बोर्ड की, सजा बच्चों को’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में कई तकनीकी और मानवीय त्रुटियों की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि मोबाइल या डिजिटल माध्यमों से उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग के दौरान गलतियां हो सकती हैं और बाद में उन त्रुटियों को सुधारने के लिए छात्रों से ही शुल्क लिया जाता है।
राहुल गांधी ने कहा, “गलती सीबीएसई की है, सजा बच्चे को मिल रही है और कमाई सरकार कर रही है।”
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के व्यवसायीकरण पर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार जब शिक्षा को सेवा के बजाय कमाई का साधन बनाया जाता है, तब विद्यार्थियों के हित पीछे छूट जाते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को अपने समय, आत्मविश्वास और भविष्य के रूप में भुगतना पड़ता है।
मूल्यांकन प्रणाली पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष लाखों छात्र परीक्षा परिणामों के बाद री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करते हैं। कई मामलों में अंक बढ़ने या मूल्यांकन त्रुटियां सामने आने से छात्रों और अभिभावकों के बीच इस प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मूल्यांकन में त्रुटि बोर्ड की ओर से हुई है तो उसके सुधार के लिए छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना उचित नहीं माना जा सकता। वहीं दूसरी ओर बोर्ड का तर्क है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में प्रशासनिक और तकनीकी खर्च शामिल होते हैं।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर विवाद के बीच CBSE की सफाई
इस पूरे विवाद के बीच सीबीएसई ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। रविवार को बोर्ड ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी आधिकारिक बयान में कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा जोखिमों और तकनीकी कमजोरियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
बोर्ड के अनुसार, उसके सेवा प्रदाता के OnMark पोर्टल में कुछ कमजोरियों की पहचान की गई थी, जिन पर तत्काल कार्रवाई की गई है। सीबीएसई ने बताया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की एक टीम पिछले कई दिनों से पोर्टल को और अधिक सुरक्षित बनाने में जुटी हुई है।
सीबीएसई ने कहा कि अधिकांश चिन्हित कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी का दुरुपयोग न हो सके।
एथिकल हैकर्स को भी दिया धन्यवाद
बोर्ड ने उन जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने संभावित सुरक्षा खामियों की जानकारी समय रहते साझा की। सीबीएसई के मुताबिक कुछ विशेषज्ञों से सीधे संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को भी सुरक्षा सुधार प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज
राहुल गांधी के बयान के बाद शिक्षा जगत में एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या छात्रों से री-इवैल्यूएशन और री-टोटलिंग के नाम पर वसूले जाने वाले शुल्क की समीक्षा की जानी चाहिए। कई अभिभावक संगठनों और छात्र समूहों ने भी मांग की है कि यदि मूल्यांकन में त्रुटि बोर्ड की ओर से साबित होती है, तो संबंधित शुल्क वापस किया जाना चाहिए।
फिलहाल सीबीएसई ने अपनी मूल्यांकन प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बताते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को छात्रों और अभिभावकों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल के रूप में उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली से जुड़े बड़े विमर्श का विषय बन सकता है।
