कोरबा दौरे पर केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर बरसे पूर्व उपमुख्यमंत्री, बोले- आम आदमी की कमर तोड़ रही महंगाई
कोरबा। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कोरबा प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने आम जनता पर महंगाई का बोझ डालना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति नहीं है, जिसका सीधा असर देश के मध्यम वर्ग, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के निवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंहदेव ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव तक पेट्रोल और डीजल के दाम नियंत्रित रखे गए, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कीमतों में लगातार बढ़ोतरी शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि यह साफ दर्शाता है कि सरकार जनता की आर्थिक परेशानियों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दे रही है।
सिंहदेव ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और सरकार केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते वैकल्पिक ऊर्जा और तेल आपूर्ति की रणनीति नहीं बनाई गई, जिसके कारण आज देश को ईंधन संकट और बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने केंद्र की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े किए। सिंहदेव ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर दो प्रमुख तेल उत्पादक देशों से कच्चा तेल लेना बंद कर दिया, जिससे न केवल अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित हुए बल्कि देश में ईंधन आपूर्ति पर भी असर पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पहले से तैयारी करती और वैकल्पिक स्रोत विकसित करती तो आज जनता को इस तरह की आर्थिक मार नहीं झेलनी पड़ती।
पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव हर वर्ग पर पड़ता है। परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों, निर्माण सामग्री, कृषि उपकरणों और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा प्रभावित किसान, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार हो रहे हैं, जिनकी आय पहले से ही सीमित है।
टी.एस. सिंहदेव ने मांग की कि पेट्रोल और डीजल को तत्काल जीएसटी के दायरे में लाया जाए, ताकि पूरे देश में ईंधन की कीमतें एक समान हो सकें और जनता को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दरों के कारण आम लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा जनता को राहत देने की नहीं, बल्कि टैक्स के जरिए अधिक राजस्व वसूलने की है।
उन्होंने कहा कि चुनावी वादों के दौरान जनता को राहत और विकास के सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद सरकार का असली चेहरा सामने आ जाता है। बढ़ती महंगाई ने आम लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है और अब लोगों के लिए रोजमर्रा का जीवन चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं पर भी सिंहदेव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के बीच अच्छे संबंध हैं, लेकिन कांग्रेस छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका पूरा परिवार वर्षों से कांग्रेस विचारधारा से जुड़ा रहा है और वे पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
कोरबा दौरे के दौरान टी.एस. सिंहदेव ने बालको, कोरबा और बांकीमोंगरा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात की। उनके इस दौरे को लेकर जिले की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देख रहे हैं।
इस दौरान पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, राजकिशोर प्रसाद, श्यामसुंदर सोनी, सुरेंद्र जायसवाल, मनोज चौहान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर चिंता व्यक्त की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती हैं। जिस तरह से लगातार महंगाई बढ़ रही है, उससे आम जनता में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ऐसे में विपक्ष इसे जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में है।
