छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा और RSS की तिरंगा यात्रा पर तीखा हमला बोला। बैज ने कहा कि जिन्होंने वर्षों तक तिरंगे को स्वीकार नहीं किया, वही आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। पढ़ें पूरा राजनीतिक घटनाक्रम और बयान।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से निकाली जा रही तिरंगा यात्रा को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इस मुद्दे पर अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग लंबे समय तक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को स्वीकार करने से बचते रहे, वही आज देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण पत्र बांटने की कोशिश कर रहे हैं।
दीपक बैज ने कहा कि भाजपा और RSS को पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोग, जिन्होंने कभी तिरंगे के तीनों रंगों तक पर सवाल उठाए थे, आज पूरे प्रदेश में तिरंगा यात्रा निकालकर राष्ट्रवाद का संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। बैज ने इसे राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि भाजपा के नेता अपने पुराने कर्मों का “पाप धोने” के लिए तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं।
‘देशभक्ति किसी पार्टी की जागीर नहीं’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि देशभक्ति किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज पूरे देश का गौरव है और प्रत्येक नागरिक उसका सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा है और तिरंगे के सम्मान के लिए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
बैज ने कहा कि आज भाजपा जिस तिरंगे के नाम पर राजनीति कर रही है, उसी तिरंगे को लेकर अतीत में कई तरह के विवाद खड़े किए गए थे। ऐसे में भाजपा को दूसरों को राष्ट्रवाद का प्रमाणपत्र देने से पहले अपने राजनीतिक और वैचारिक इतिहास का आत्ममंथन करना चाहिए।
RSS और भाजपा के इतिहास पर उठाए सवाल
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक RSS के कार्यालयों में तिरंगा नहीं फहराया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास के कई ऐसे तथ्य हैं, जिन पर भाजपा आज चर्चा नहीं करना चाहती। बैज ने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि जिन लोगों ने वर्षों तक राष्ट्रीय ध्वज को लेकर अलग रुख अपनाया, वे आज अचानक तिरंगा यात्रा निकालकर देशभक्ति का प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तिरंगे का सम्मान हर भारतीय की जिम्मेदारी है, लेकिन इसे राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाना उचित नहीं माना जा सकता।
‘कर्मों का पाप धोने के लिए निकाल रहे तिरंगा यात्रा’
अपने बयान के दौरान दीपक बैज ने भाजपा पर सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि,
“भाजपाई अपने कर्मों का पाप धोने के लिए तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आज जिस राष्ट्रवाद की बात कर रही है, वह केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित दिखाई देता है। यदि वास्तव में तिरंगे के प्रति सम्मान होता तो उसके इतिहास को लेकर कभी विवाद खड़े नहीं होते।
बैज ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और देशभक्ति के नाम पर राजनीतिक संदेश देने वालों को जनता समय आने पर जवाब देगी।
तिरंगा यात्रा को लेकर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
प्रदेश में भाजपा की ओर से आयोजित तिरंगा यात्रा के बाद कांग्रेस लगातार हमलावर बनी हुई है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा राष्ट्रीय प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य देशवासियों में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करना है।
इसी मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।
तिरंगे को लेकर दोनों दलों की अलग-अलग दलीलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय ध्वज जैसे भावनात्मक विषय पर बयानबाजी का असर आम जनता तक भी पहुंचता है। एक ओर भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति का अभियान बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्यक्रम करार दे रही है।
ऐसे में तिरंगा यात्रा अब केवल एक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में विचारधारा और राष्ट्रवाद की बहस का नया केंद्र बन गई है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बढ़ी गर्माहट
प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच इस तरह के बयान चुनावी माहौल को भी प्रभावित कर सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जनता के बीच अपने-अपने संदेश को मजबूती से रखने में जुटे हैं।
दीपक बैज के बयान के बाद भाजपा की ओर से भी जवाबी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तिरंगा यात्रा और राष्ट्रवाद का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।
राजनीतिक संदर्भ में अहम मुद्दा
तिरंगा भारत की एकता, अखंडता और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में जब राष्ट्रीय ध्वज को लेकर राजनीतिक बयान सामने आते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रख रहे हैं, जबकि इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती दिखाई दे रही है।
