रायपुर मं कांग्रेस मुख्यालय घेराव के बाद दर्ज एफआईआर ऊपर छत्तीसगढ़ के राजनीति गरमा गे हवय। कांग्रेस पुलिस कार्रवाई ला पक्षपातपूर्ण बतावत सरकार ऊपर हमला बोलिस, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव पुलिस कार्रवाई ला उचित ठहराइन। पढ़व पूरा खबर।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। राजधानी रायपुर मं कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय के घेराव के दौरान हुए बवाल के बाद अब मामला सड़क ले निकलके सियासत के केंद्र मं पहुंच गे हवय। घटना के बाद दर्ज एफआईआर ला लेके सत्ता पक्ष अउ विपक्ष आमने-सामने आ गे हवंय। कांग्रेस पुलिस कार्रवाई ला एकतरफा अउ पक्षपातपूर्ण बतावत राज्य सरकार ऊपर गंभीर आरोप लगा रहिस, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पुलिस के कार्रवाई ला कानून व्यवस्था बनाए रखे बर जरूरी कदम बतावत विपक्ष के आरोप मन ला पूरी तरह खारिज कर दिस हवय।
ए मामला अब सिरिफ कानून व्यवस्था तक सीमित नइ रहिस, बल्कि प्रदेश के राजनीति मं आरोप-प्रत्यारोप के नया दौर शुरू हो गे हवय। कांग्रेस अउ भाजपा दूनो अपन-अपन पक्ष जनता के सामने रखत हवंय।
का हे पूरा मामला?
भाजपा द्वारा कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय के घेराव कार्यक्रम के दौरान राजधानी रायपुर मं तनावपूर्ण स्थिति बन गे रहिस। प्रदर्शन के बीच धक्का-मुक्की, नारेबाजी अउ हंगामा के खबर सामने आइस। घटना के बाद पुलिस एफआईआर दर्ज करिस, जेन ला लेके विवाद शुरू होगे।
कांग्रेस के आरोप हवय कि हमला भाजपा कार्यकर्ता मन करिन, फेर कार्रवाई सिरिफ कांग्रेस नेता अउ कार्यकर्ता मन ऊपर करे गे। दूसर तरफ भाजपा के कहना हवय कि पुलिस उपलब्ध साक्ष्य अउ कानून के आधार ऊपर कार्रवाई करिस।
सुशील आनंद शुक्ला के आरोप – “भाजपा कार्यकर्ता मन हमला करिन”
कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला पत्रकार मन ले चर्चा करत गंभीर आरोप लगाइन। ओमन कहिन कि भाजपा कार्यकर्ता मन कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय तक पहुंचके हमला करिन अउ पार्टी कार्यकर्ता मन ऊपर पत्थरबाजी करिन।
शुक्ला के मुताबिक, स्थिति बिगड़ई के बाद पुलिस कांग्रेस कार्यकर्ता मन ऊपर आंसू गैस के गोला घलो छोड़िस। ओमन सवाल उठाइन कि जब घटना मं दूनो पक्ष शामिल रहिन, त एफआईआर सिरिफ कांग्रेस नेता अउ कार्यकर्ता मन ऊपर काबर दर्ज करे गे?
ओमन ए कार्रवाई ला एकतरफा बतावत निष्पक्ष जांच के मांग करिन।
“कांग्रेस कार्यकर्ता मन ला बनाय जात हवय निशाना”
सुशील आनंद शुक्ला के कहना रहिस कि ए पूरा कार्रवाई ले साफ दिखत हवय कि विपक्ष के आवाज दबाय के कोशिश होवत हवय।
ओमन आरोप लगाइन कि कांग्रेस कार्यकर्ता मन ऊपर अनावश्यक कानूनी दबाव बनाय जात हवय, जबकि भाजपा कार्यकर्ता मन के खिलाफ समान कार्रवाई नजर नइ आवत।
कांग्रेस के मुताबिक, लोकतंत्र मं विरोध जताय हर राजनीतिक दल के अधिकार आय, फेर कानून के पालन मं निष्पक्षता जरूरी हवय।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव के पलटवार
कांग्रेस के आरोप मन ऊपर प्रतिक्रिया देत उपमुख्यमंत्री अरुण साव साफ कहिन कि भाजपा के विरोध प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीका ले आयोजित करे गे रहिस।
ओमन आरोप लगाइन कि प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता मन के व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप नइ रहिस। साव के मुताबिक, कांग्रेस कार्यकर्ता मन डंडा लहरावत रहिन अउ स्थिति ला बिगाड़े के कोशिश करिन।
अरुण साव कहिन कि ए परिस्थिति मं पुलिस के जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखना रहिथे, जेनला पुलिस निभाइस।
“कानून अपन काम करही” – अरुण साव
उपमुख्यमंत्री कहिन कि अगर कऊनो व्यक्ति हिंसा, उपद्रव या कानून व्यवस्था बिगाड़े के कोशिश करथे, त पुलिस कार्रवाई करना स्वाभाविक आय।
ओमन साफ शब्द मं कहिन कि कानून ककरो दबाव मं काम नइ करय। जऊन मन दोषी होहीं, ओमन ऊपर कानून अनुसार कार्रवाई होही।
अरुण साव के अनुसार, ए मामला मं पुलिस स्वतंत्र रूप ले काम करत हवय अउ सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखे बर प्रतिबद्ध हवय।
पुलिस ऊपर दबाव बनाय के आरोप
अरुण साव कांग्रेस ऊपर घलो गंभीर आरोप लगाइन। ओमन कहिन कि कांग्रेस लगातार पुलिस अउ प्रशासन ऊपर दबाव बनाय के कोशिश करत हवय।
ओमन के मुताबिक, जांच एजेंसी मन स्वतंत्र हवंय अउ कानून के दायरा मं काम करत हवंय। राजनीतिक बयानबाजी ले जांच प्रभावित नइ हो सकय।
साव कहिन कि लोकतंत्र मं हर पार्टी ला विरोध करे के अधिकार हवय, फेर हिंसा या अशांति फैलाय के अनुमति ककरो नइ मिल सकय।
प्रदेश के राजनीति मं गरमाइस माहौल
ए घटना के बाद छत्तीसगढ़ के राजनीति अउ गरमा गे हवय। कांग्रेस पुलिस कार्रवाई के निष्पक्षता ऊपर सवाल उठा रहिस, जबकि भाजपा प्रशासनिक कार्रवाई के समर्थन मं खड़ी हवय।
राजनीतिक विश्लेषक मन के मानना हे कि ए मामला आने वाला दिन मं अउ जियादा राजनीतिक रूप ले उभर सकथे। विपक्ष जांच के निष्पक्षता के मुद्दा ला लगातार उठाय सकथे, जबकि सत्ता पक्ष कानून व्यवस्था के सवाल ऊपर अपन पक्ष रखत रही।
एफआईआर अउ जांच बने हवय मुख्य मुद्दा
फिलहाल ए पूरा विवाद के केंद्र मं एफआईआर अउ पुलिस जांच हवय। यदि जांच मं नए तथ्य सामने आथें, त कार्रवाई के दायरा बदल सकथे।
राजनीतिक हलका मं ए चर्चा घलो हवय कि अगर दूसर पक्ष के शिकायत या सबूत सामने आथे, त पुलिस ओकर आधार ऊपर घलो आगे के कार्रवाई कर सकथे।
लोकतंत्र मं विरोध अउ जिम्मेदारी दूनो जरूरी
राजनीतिक विशेषज्ञ मन के अनुसार लोकतंत्र मं विरोध-प्रदर्शन हर दल के संवैधानिक अधिकार आय। फेर विरोध शांतिपूर्ण होय अउ कानून व्यवस्था प्रभावित नइ होय, ए घलो उतके जरूरी हवय।
अइसने घटना मन मं पुलिस के भूमिका निष्पक्ष बने रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के भरोसा बर महत्वपूर्ण माने जाथे। ए कारण ले जनता के नजर अब जांच के निष्कर्ष ऊपर टिके हवय।
फिलहाल कांग्रेस अउ भाजपा दूनो अपन-अपन दावा करथें, जबकि अंतिम स्थिति पुलिस जांच अउ कानूनी प्रक्रिया पूरा होए के बाद ही स्पष्ट होही।
