बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) शहर के लिंगियाडीह इलाका मं अपन घर अउ रोजी-रोटी बचाय के लड़ई अब लंबा जनआंदोलन के रूप ले ले चुके हवय। गर्मी के तपत धूप होवय या बरसात के लगातार पानी, सैकड़ों परिवार पिछले 240 दिन ले खुले आसमान के नीचे धरना मं डटे हवंय। आंदोलनकारी मन के कहना हवय कि ए लड़ई सिरिफ मकान बचाय बर नइ, बल्कि अपन बरसों के बसे-बसाए आशियाना, रोजी-रोटी अउ सम्मानजनक जीवन के अधिकार बर आय।
शुरुआत मं कुछ ग्रामीण मन के छोट विरोध ले सुरू होय ए आंदोलन आज लिंगियाडीह के सैकड़ों परिवार मन के आवाज बन गे हवय। आंदोलनकारी मन के मुताबिक, शासन-प्रशासन तक ए मामला पहुंचिस जरूर, फेर अब तक कोनो अइसन ठोस फैसला नइ होय हवय जेन ले प्रभावित परिवार मन ल राहत मिल सके।

35 लोगन ले सुरू होय आंदोलन, अब बन गे जनआंदोलन
आंदोलन के शुरुआत मं केवल 35 ग्रामीण अपन मांग ल लेके धरना मं बैठिन। धीरे-धीरे जब दूसर परिवार मन घलो अपन ऊपर मंडरावत बेदखली के खतरा ल महसूस करिन, त आंदोलन मं लोगन के संख्या लगातार बढ़त गीस।
आज हालत ए आय कि सैकड़ों परिवार, महिला, बुजुर्ग, युवा अउ लइका मन रोज धरना स्थल मं पहुंचके अपन हक के आवाज बुलंद करत हवंय। आंदोलनकारी मन के कहना हवय कि ए लड़ई अब केवल एक मोहल्ला के नइ, बल्कि ओ सबो गरीब अउ मध्यमवर्गीय परिवार मन के लड़ई आय, जेन मन बर अपन घर सबसे बड़ा सहारा आय।

धूप-बरसात के बीच खुले आसमान तले धरना
धरना स्थल अपोलो रोड, दुर्गा चौक अउ राजकिशोर नगर के आसपास लगातार सक्रिय बने हवय। बरसात के मौसम मं घलो लोगन प्लास्टिक के तिरपाल अउ अस्थायी छांव के सहारे धरना जारी रखे हवंय।
गर्मी मं तेज धूप अउ अब बरसात के बावजूद आंदोलनकारी मन अपन जगह ले हटे तैयार नइ दिखत हवंय। महिला मन छोटे-छोटे लइका मन संग धरना मं शामिल होवत हवंय, जबकि बुजुर्ग मन घलो रोज आंदोलन स्थल पहुंचत हवंय।
ग्रामीण मन के कहना हवय कि जब तक ओमन के मांग ऊपर गंभीरता ले विचार नइ होही, तब तक आंदोलन जारी रहिही।
गार्डन अउ व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स योजना के विरोध
आंदोलनकारी मन के मुताबिक, नगर निगम ह ए इलाका मं गार्डन अउ व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाय के योजना तैयार करे हवय। ए योजना के चलते बरसों ले बसे मकान अउ दुकान मन ल हटाय के तैयारी चलत हवय।
धरना मं शामिल लोगन के दावा हवय कि ए इलाका मं कई परिवार करीब 50 बछर ले रहत आथें। इहीच जगह ले ओमन अपन परिवार चलावत हवंय, व्यापार करत हवंय अउ जीवन बितावत हवंय।
ग्रामीण मन कहिथें कि यदि मकान अउ दुकान हटा दे जाही, त सैकड़ों परिवार एक झटके मं बेघर अउ बेरोजगार हो जाहीं।
पहिली घलो टूट चुके हवंय मकान-दुकान
आंदोलनकारी मन बताथें कि ए पहिली बेर नइ आय, जब विकास कार्य के नाम ऊपर मकान हटाय के कार्रवाई होवत हवय।
ओमन के अनुसार, सड़क अउ नाली निर्माण के नाम ले पहिली घलो कई मकान अउ दुकान तोड़े जा चुके हवंय। अब फेर ले नवा योजना के तहत फेर बेदखली के स्थिति बनत हवय।
धरना मं बैठे परिवार मन के कहना हवय कि विकास जरूरी हवय, फेर विकास अइसन नई होय के चाही जेन ले बरसों ले बसे परिवार मन बेघर हो जावंय।
पट्टा के नाम मं राशि लेय के आरोप
आंदोलनकारी मन के एक प्रमुख आरोप ए घलो हवय कि नगर निगम ह पट्टा देय के नाम मं कई परिवार मन ले राशि जमा करवाइस रहिस।
ओमन के मुताबिक, राशि जमा करे के बाद निगम ह रसीद त दिहिस, फेर आज तक पट्टा जारी नइ करे गीस। अब ओही परिवार मन ल कब्जा हटाय के नोटिस मिलत हवय, जेन ले लोगन मं नाराजगी बढ़त जावत हवय।
धरना मं शामिल नागरिक मन के कहना हवय कि जब शासन ह राशि लेके रसीद दे चुके हवय, त अब बिना स्थायी समाधान के बेदखली उचित नइ हो सकय।
कई बेर आवेदन, फेर समाधान अब तक नइ
आंदोलनकारी मन बताथें कि ए मामला ल लेके कई बेर नगर निगम अउ प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मन ल आवेदन देय जा चुके हवय।
प्रतिनिधिमंडल ह चर्चा के माध्यम ले समाधान खोजे के प्रयास घलो करिस, फेर अब तक कोनो ठोस नतीजा सामने नइ आइस।
ग्रामीण मन के कहना हवय कि अगर बातचीत ले रास्ता निकल जाही, त आंदोलन के जरूरत घलो नइ पड़ही। फेर वर्तमान मं ओमन के अनुसार प्रशासन के ओर ले संतोषजनक पहल नइ दिखत हवय।
सैकड़ों परिवार के भविष्य ऊपर मंडरावत हवय चिंता
धरना मं शामिल परिवार मन के सामने सबसे बड़ी चिंता अपन भविष्य के हवय। कई परिवार मन के रोजी-रोटी दुकान ले चलथे, त कई मन बर ए मकान जीवनभर के जमा-पूंजी आय।
अगर बेदखली होथे, त केवल मकान नइ टूटही, बल्कि परिवार मन के रोजगार, लइका मन के पढ़ई अउ पूरा सामाजिक जीवन ऊपर घलो असर पड़ सकथे।
महिला मन कहिथें कि नया जगह बसना गरीब परिवार बर आसान नइ होथे। ए कारण ले ओमन अपन अधिकार अउ पुनर्वास के मांग करत हवंय।
समाधान के उम्मीद मं बैठे हवंय आंदोलनकारी
240 दिन ले लगातार चलत ए आंदोलन ए बात के संकेत देथे कि मामला अब केवल स्थानीय विवाद नइ रहिगे, बल्कि सैकड़ों परिवार के जीवन ले जुड़ गे हवय।
धरना मं शामिल लोगन के मांग हवय कि प्रशासन विकास योजना ऊपर आगे बढ़े के पहिली प्रभावित परिवार मन संग सार्थक चर्चा करय अउ पुनर्वास, पट्टा अउ वैकल्पिक व्यवस्था ऊपर स्पष्ट निर्णय लेवय।
फिलहाल आंदोलन जारी हवय अउ प्रभावित परिवार मन ए उम्मीद मं बैठे हवंय कि शासन-प्रशासन जल्द अइसन रास्ता निकालही, जेन ले विकास घलो होवय अउ बरसों ले बसे परिवार मन के आशियाना घलो सुरक्षित रहय।
