Korba (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) विकास, सुशासन अउ बुनियादी सुविधा के दावा के बीच कोरबा जिला के पाली विकासखंड ले अइसन तस्वीर सामने आइस, जेन ह गांव के असलियत ल उजागर कर दिस। केंवरा ग्राम पंचायत के आश्रित ईरई गांव मं सड़क अउ पुल के अभाव अइसने हालात पैदा कर दिस कि एक परिवार ल अपन प्रियजन के अंतिम विदाई बर घलो संघर्ष करना पड़िस।
गांव निवासी मोतीलाल भुनुवार के पत्नी के निधन के बाद परिजन मन चाहत रहिन कि सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार होवय। फेर गांव तक सड़क नइ होए अउ वाहन के पहुंचना असंभव होए के कारण ग्रामीण मन ल मजबूरी मं बांस अउ लकड़ी ले डांडी (अर्थी) बनाके शव ल लगभग दू किलोमीटर तक कांधा मं उठाके मुख्य सड़क तक ले जाए बर पड़िस।
ए घटना के वीडियो सोशल मीडिया मं तेजी ले वायरल होवत हवय। वीडियो देखके लोगन के मन मं संवेदना के संग-संग ए सवाल घलो उठत हवय कि आज घलो अइसने गांव हवंय, जिहां बुनियादी सुविधा के कमी के कारण अंतिम यात्रा तक कठिन बन जाथे।

अंतिम विदाई घलो बन गे संघर्ष
गांव के लोगन के अनुसार, कुछ दिन पहिली मोतीलाल भुनुवार के पत्नी के निधन होगे। परिवार ऊपर दुख के पहाड़ त टूटेच रहिस, फेर ए दुख अउ बढ़गे जब पता चलिस कि गांव तक कोनो वाहन नई पहुंच सकय।
गांव मं पक्की सड़क नइ होए के कारण एम्बुलेंस त दूर, छोट वाहन घलो नई पहुंच पावत। अइसने मं परिजन मन ल गांव के लोगन के सहयोग ले बांस अउ लकड़ी के डांडी तैयार करना पड़िस।
शव ल डांडी ऊपर रखके ग्रामीण मन बारी-बारी ले कांधा देत लगभग दू किलोमीटर पैदल चलिन। तब जाके मुख्य सड़क पहुंच पाइन, जिहां ले आगे के अंतिम संस्कार बर व्यवस्था हो सकिस।
ए दृश्य सिरिफ एक परिवार के पीरा नइ, बल्कि ओ सबो गांव मन के कहानी आय जिहां बुनियादी सुविधा आज घलो सपना बने हवय।
गांव अउ मुख्य सड़क के बीच पुल के अभाव सबसे बड़ी समस्या
ग्रामीण मन बताथें कि ईरई गांव अउ मुख्य सड़क के बीच एक नाला पड़थे। ए नाला ऊपर आज तक पुल के निर्माण नई होय हवय।
बरसात के दिन मं नाला उफान मं आ जाथे, जेन ले गांव के संपर्क पूरी तरह टूट जाथे। अइसने समय मं मरीज ल अस्पताल पहुंचाना, लइका मन के स्कूल जाना, किसान मन के उपज बाहर ले जाना अउ जरूरी सामान लाना तक मुश्किल हो जाथे।
अगर कोनो गंभीर बीमारी या आपातकालीन स्थिति बन जावय, त ग्रामीण मन ल भगवान भरोसा रहना पड़थे।
बरसात मं बढ़ जाथे परेशानी
ग्रामीण मन के कहना हवय कि गर्मी अउ सामान्य मौसम मं घलो आवागमन आसान नइ रहय, फेर बरसात सुरू होवत ही हालात अउ गंभीर हो जाथे।
कीचड़, उफनत नाला अउ कच्चा रास्ता के कारण गांव लगभग अलग-थलग पड़ जाथे। कई बेर गर्भवती महिला, बुजुर्ग अउ बीमार मन ल चारपाई या डांडी मं उठाके मुख्य सड़क तक ले जाए के नौबत आ जाथे।
अब अंतिम यात्रा के दौरान घलो अइसने दृश्य सामने आना, गांव के लोगन के पीरा ल अउ गहरा कर दिस।
वायरल वीडियो ले उठत हवय कई सवाल
घटना के वीडियो सोशल मीडिया मं वायरल होए के बाद लोगन अलग-अलग प्रतिक्रिया देत हवंय।
कई लोग ए घटना ल ग्रामीण इलाका के वास्तविक स्थिति बतावत बुनियादी सुविधा के कमी ऊपर चिंता जतावत हवंय। दूसर मन के कहना हवय कि विकास के योजना के असली सफलता तभे मानी जाही, जब अइसने दूरस्थ गांव तक सड़क, पुल अउ जरूरी सुविधा पहुंचही।
सोशल मीडिया मं वीडियो देखके कई नागरिक मन प्रशासन ले तत्काल सड़क अउ पुल निर्माण के मांग घलो करथें।
ग्रामीण मन के बरसों ले एके मांग
ईरई गांव के रहइया मन बताथें कि सड़क अउ पुल के मांग आज के नइ, बल्कि बरसों ले करत आथें। कई बेर आवेदन, जनदर्शन अउ अधिकारी मन ल जानकारी देय के बाद घलो अब तक स्थायी समाधान नइ मिलिस।
ग्रामीण मन के मते, अगर नाला ऊपर मजबूत पुल बन जावय अउ गांव तक सड़क पहुंच जावय, त ए इलाका के हजारों लोगन के जीवन आसान हो जाही।
सड़क बने ले शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती, रोजगार अउ सरकारी योजना मन के लाभ घलो गांव तक बेहतर ढंग ले पहुंच सकही।
सड़क सिरिफ सुविधा नइ, जीवन रेखा आय
ग्रामीण इलाका बर सड़क के मतलब सिरिफ वाहन चलना नइ होथे। ए अस्पताल पहुंचाय के जरिया आय, किसान के मेहनत ल बाजार तक पहुंचाय के साधन आय, छात्र मन के पढ़ई के रास्ता आय अउ आपातकालीन स्थिति मं जीवन बचाय के माध्यम घलो आय।
ईरई गांव के घटना ए बात के याद दिलाथे कि जिहां सड़क नइ, उहां विकास के कई दावा अधूरा दिखथे।
स्थायी समाधान के उम्मीद मं गांव
गांव के लोगन चाहथें कि ए घटना के बाद जिम्मेदार विभाग तत्काल स्थिति के गंभीरता समझय अउ सड़क अउ पुल निर्माण बर ठोस कदम उठावय।
ग्रामीण मन के कहना हवय कि ओमन केवल सुविधा नइ, बल्कि सम्मानजनक जीवन के अधिकार मांगत हवंय। कोनो परिवार ल अपन प्रियजन के अंतिम विदाई बर अइसने संघर्ष करे के नौबत फिर ले नइ आना चाही।
ईरई गांव के ए घटना आज केवल एक खबर नइ, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण इलाका मं बुनियादी सुविधा के वास्तविक स्थिति के आईना बनके सामने आइस। अब देखे के बात होही कि ए वायरल वीडियो अउ ग्रामीण मन के आवाज के बाद संबंधित विभाग अउ प्रशासन कतेक जल्दी ठोस कार्रवाई करथे।
