मुंगेली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। मुंगेली जिला के लोरमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खुड़िया अऊ ओकर आसपास के वनांचल इलाका मं रहइया आर्थिक रूप ले कमजोर आदिवासी परिवार मन संग कथित ठगी अऊ आर्थिक शोषण के गंभीर मामला सामने आइस हवय। मामला उजागर होय के बाद कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी) अऊ वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) ला लिखित शिकायत सौंप के निष्पक्ष अऊ उच्चस्तरीय जांच कराय के मांग करे गे हवय।
शिकायत मं आरोप लगाय गे हवय कि कुछ अज्ञात लोगन मन सरकारी जमीन के पट्टा दिलाय के भरोसा देके गरीब अऊ अशिक्षित आदिवासी परिवार मन ला अपन जाल मं फंसा रहल हवंय। शिकायतकर्ता मन के मुताबिक, कई परिवार मन ले 30 हजार ले 50 हजार रुपिया, अऊ कुछ मामला मं ओकर ले घलो जियादा रकम वसूले के बात सामने आइस हवय।
पट्टा दिलाय के नाम मं हजारों रुपिया वसूले के आरोप
शिकायत पत्र के मुताबिक, आरोपी मन गांव-गांव घूमके खुद ला प्रभावशाली अऊ सरकारी काम कराय वाला बताथें। वो मन गरीब परिवार मन ला भरोसा देवाथें कि कुछ रकम देहू, त सरकारी जमीन के पट्टा आसानी ले मिल जाही।
ग्रामीण मन के कहना हवय कि सरकारी प्रक्रिया के जानकारी नई होय के कारण कई परिवार मन अपन जीवनभर के जमा-पूंजी या उधार लेके रकम दे डारिन। बाद मं जेन दस्तावेज मन ओमन ला देय गीस, ओकर असली होय ऊपर संदेह जताय जात हवय।
AI ले फर्जी दस्तावेज बनाय के संदेह ले बढ़िस मामला के गंभीरता
ए मामला के सबसे चौंकाय वाला पहलू ये आय कि शिकायत मं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के संदेह घलो जताय गे हवय।
शिकायतकर्ता मन के कहना हवय कि ग्रामीण मन ला जेन कथित पट्टा दस्तावेज देय गे हवय, ओमन के डिजाइन, फॉर्मेट अऊ जानकारी देखके लगथे कि ए दस्तावेज आधुनिक तकनीक या AI के माध्यम ले तैयार करे गे हो सकथे।
हालांकि, ए बात के अभी तक आधिकारिक पुष्टि नई होय हवय। अगर जांच मं ए आरोप सही साबित होथे, त ए सिरिफ फर्जीवाड़ा के मामला नइ रहिही, बल्कि आधुनिक तकनीक के गलत इस्तेमाल के एक गंभीर उदाहरण बन सकथे। ए कारण ले शिकायतकर्ता मन दस्तावेजी साक्ष्य संग-संग डिजिटल अऊ इलेक्ट्रॉनिक जांच कराय के घलो मांग करे हवंय।
डीएफओ कहिन—दोषी बचही नइ, निष्पक्ष जांच होही
पूरा मामला ऊपर मुंगेली के वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) अभिनव कुमार के कहना हवय कि शिकायत मिलतेच विभाग गंभीरता ले कार्रवाई शुरू कर दिस हवय।
डीएफओ साफ कहिन कि पूरा मामला के निष्पक्ष जांच कराय जाही। जांच मं जऊन घलो तथ्य सामने आही, ओकर आधार मं जिम्मेदार व्यक्ति मन ऊपर कानून मुताबिक कड़ी कार्रवाई करे जाही। अगर कोई दोषी पाय जाथे, त ओकर खिलाफ वैधानिक कार्रवाई मं कऊनो ढिलाई नई बरती जाही।
ग्रामीण मन ला बिचौलिया ले सावधान रहाय के अपील
डीएफओ अभिनव कुमार क्षेत्र के ग्रामीण अऊ आदिवासी परिवार मन ले अपील घलो करे हवंय कि कोनो घलो व्यक्ति अगर सरकारी जमीन के पट्टा दिलाय के नाम मं रुपिया मांगे, त ओकर बहकावा मं बिल्कुल नई आवंय।
ओमन कहिन कि शासकीय योजना या पट्टा संबंधी जानकारी सिरिफ अधिकृत कार्यालय लेच लेवव। कोनो प्रकार के लेन-देन करे के पहिली संबंधित विभाग ले दस्तावेज के जांच जरूर करवावव। अगर कोनो संदिग्ध गतिविधि दिखे, त तुरंत प्रशासन या पुलिस ला जानकारी देवव।
दस्तावेज अऊ इलेक्ट्रॉनिक जांच के मांग
शिकायत मं ए घलो मांग करे गे हवय कि कथित फर्जी पट्टा दस्तावेज मन ला सुरक्षित रखके ओकर तकनीकी जांच कराय जावय। जरूरत पड़य त साइबर विशेषज्ञ मन के मदद ले दस्तावेज के सत्यापन कराय जावय, ताकि ये साफ हो सके कि दस्तावेज असली हवय या डिजिटल माध्यम ले फर्जी तैयार करे गे हवय।
शिकायतकर्ता मन चाहथें कि पूरा वनांचल इलाका मं जारी होय कथित पट्टा दस्तावेज मन के भौतिक अऊ तकनीकी सत्यापन कराय जावय, ताकि भविष्य मं अइसने ठगी के घटना दोबारा नई होवय।
गरीब आदिवासी मन के भरोसा ऊपर हमला
वनांचल इलाका मं रहइया अधिकांश परिवार सरकारी योजना अऊ प्रशासन ऊपर भरोसा करके अपन हक के उम्मीद रखथें। अगर जांच मं ए आरोप सही साबित होथे, त ए सिरिफ आर्थिक ठगी नइ, बल्कि गरीब आदिवासी मन के भरोसा अऊ अधिकार ऊपर सीधा हमला माने जाही।
आज के समय मं डिजिटल तकनीक तेजी ले बढ़त हवय, फेर ओकर दुरुपयोग घलो समाज बर नई चुनौती बनत जात हवय। अइसने मामला प्रशासन बर घलो चेतावनी आय कि आधुनिक तकनीक के गलत इस्तेमाल ऊपर समय रहते कड़ा नियंत्रण जरूरी हवय।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरा मं हवय। अब सबके नजर प्रशासन, पुलिस अऊ वन विभाग के जांच ऊपर टिके हवय कि जांच मं का तथ्य सामने आथे अऊ दोषी मन ऊपर कब तक कार्रवाई होथे।
