बोकारो (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) | चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र मं झारखंड के बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) ह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करे हे। अस्पताल के ब्लड सेंटर मं नियमित जांच के दौरान दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूह मन मं से एक ‘बॉम्बे ब्लड ग्रुप’ (Bombay Blood Group / Oh या HH Blood Group) के सफल पहचान करे गे हे। ए खोज सिरिफ अस्पताल बर नई, बल्कि पूरा चिकित्सा जगत बर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जात हे।
विशेषज्ञ मन के मुताबिक, ए ब्लड ग्रुप दुनिया भर मं अत्यंत दुर्लभ हे। वैश्विक स्तर मं लगभग 40 लाख लोग मं सिरिफ एक व्यक्ति मं ए रक्त समूह मिलथे। भारत मं घलो एखर उपलब्धता बहुत कम हे अउ अनुमानित रूप ले 10 हजार मं एक व्यक्ति मं ए ब्लड ग्रुप पाय जाथे। ए कारण ले जरूरत पड़य के समय ए रक्त समूह उपलब्ध कराना सबसे कठिन चुनौती मं से एक माने जाथे।
नियमित जांच के दौरान होइस दुर्लभ पहचान
बोकारो जनरल अस्पताल के ब्लड सेंटर मं नियमित रक्त जांच के दौरान एक रक्त नमूना संदिग्ध दिखिस। मेडिकल टीम ह मामला ला गंभीरता ले लेते विशेष ब्लड ग्रुपिंग, क्रॉस-मैचिंग अउ एंटीजन टेस्टिंग करिस।
सभी वैज्ञानिक जांच पूरा होय के बाद पुष्टि होइस कि संबंधित रक्तदाता के ब्लड ग्रुप वास्तव मं बॉम्बे ब्लड ग्रुप (HH/Oh) हे। ए पुष्टि अस्पताल के विशेषज्ञ टीम बर घलो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहिस।
का होथे बॉम्बे ब्लड ग्रुप?
सामान्य तौर ऊपर अधिकांश लोग A, B, AB अउ O ब्लड ग्रुप के बारे मं जानथें। ए सबो ब्लड ग्रुप के पॉजिटिव अउ नेगेटिव प्रकार घलो होथे।
लेकिन बॉम्बे ब्लड ग्रुप ए सबले अलग हे। विशेषज्ञ मन बताथें कि सामान्य O ब्लड ग्रुप मं ‘H एंटीजन’ मौजूद रहिथे, जबकि बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति के शरीर मं ए H एंटीजन बिल्कुल नई होय।
एही विशेषता ए ब्लड ग्रुप ला दुनिया के सबसे दुर्लभ रक्त समूह मन मं शामिल करथे।
सिरिफ बॉम्बे ब्लड ग्रुप लेच हो सकथे रक्त चढ़ाना
डॉक्टर मन के अनुसार, ए ब्लड ग्रुप के मरीज मन बर सबसे बड़ी चुनौती उपचार के समय सामने आथे।
अगर ए व्यक्ति ला जरूरत पड़य, त ओला सिरिफ बॉम्बे ब्लड ग्रुप के रक्तच चढ़ाए जा सकथे।
अगर गलती ले सामान्य O पॉजिटिव या O नेगेटिव ब्लड चढ़ा दे जावय, त मरीज के शरीर मं गंभीर हेमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन हो सकथे, जेन जानलेवा साबित हो सकथे।
ए कारण ले सही समय मं सही ब्लड ग्रुप के पहचान मरीज के जान बचाय मं सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे।
1952 मं पहली बार होइस खोज
इतिहास के अनुसार, ए दुर्लभ रक्त समूह के पहली पहचान 1952 मं मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) मं करे गे रहिस।
एखर खोज ओतके होय के कारण ए रक्त समूह के नाम ‘बॉम्बे ब्लड ग्रुप’ रखे गे। बाद मं चिकित्सा विज्ञान मं एला Oh या HH Blood Group के नाम ले घलो पहचाने जाए लगिस।
आज घलो ए रक्त समूह ऊपर दुनिया भर मं लगातार शोध जारी हे।
भविष्य बर सुरक्षित करे गे रक्तदाता के रिकॉर्ड
बोकारो जनरल अस्पताल के प्रमुख डॉ. बी.बी. करुणामय अउ ब्लड सेंटर प्रभारी डॉ. अनिंदो मंडल के मार्गदर्शन मं मेडिकल टीम ह संबंधित रक्तदाता के पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखे हे।
डॉक्टर मन के कहना हे कि अगर भविष्य मं कोनो आपातकालीन स्थिति बनथे, त तुरंत ए रक्तदाता ले संपर्क करके जरूरतमंद मरीज के जान बचाय जा सकही।
ए व्यवस्था दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले मरीज मन बर बहुत उपयोगी साबित हो सकथे।
परिवार के सदस्य मन के घलो होवत हे जांच
विशेषज्ञ मन के मुताबिक, बॉम्बे ब्लड ग्रुप एक आनुवंशिक (Genetic) रक्त समूह आय।
ए कारण ले अस्पताल प्रबंधन अब संबंधित रक्तदाता के परिवार के सदस्य मन के घलो फैमिली स्क्रीनिंग करवावत हे, ताकि अगर परिवार मं अउ कोनो सदस्य मं ए ब्लड ग्रुप होय, त ओकर जानकारी समय रहते उपलब्ध रहय।
ए जानकारी भविष्य मं आपातकालीन चिकित्सा बर अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकथे।
अत्याधुनिक जांच सुविधा के मिलिस प्रमाण
अस्पताल प्रबंधन के कहना हे कि ए सफलता आधुनिक लैब सुविधा, अनुभवी डॉक्टर मन अउ उच्च गुणवत्ता के डायग्नोस्टिक सिस्टम के परिणाम आय।
विशेषज्ञ मेडिकल टीम के सतर्कता ले ए दुर्लभ ब्लड ग्रुप के समय रहते पहचान संभव होइस, जेन ले भविष्य मं कई गंभीर मरीज मन के जान बचाय जा सकथे।
रक्तदान के महत्व ला समझना जरूरी
डॉक्टर मन लगातार नागरिक मन ले नियमित रक्तदान करे के अपील करथें।
विशेष रूप ले दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति मन अगर अपन जानकारी ब्लड बैंक मं दर्ज करवाथें, त जरूरत के समय बहुत लोगन के जीवन बचाय जा सकथे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मन के कहना हे कि स्वैच्छिक रक्तदान समाज के सबसे बड़ा मानव सेवा मं से एक आय।
चिकित्सा जगत बर महत्वपूर्ण उपलब्धि
बोकारो जनरल अस्पताल मं बॉम्बे ब्लड ग्रुप के सफल पहचान सिरिफ एक मेडिकल उपलब्धि नइ, बल्कि दुर्लभ रक्त समूह के मरीज मन बर नई उम्मीद के रूप मं देखे जात हे।
ए उपलब्धि बताथे कि आधुनिक जांच तकनीक, प्रशिक्षित विशेषज्ञ अउ समय पर सही परीक्षण ले कठिन ले कठिन चिकित्सा चुनौती घलो सफलतापूर्वक संभाले जा सकथे।
आने वाले समय मं ए प्रकार के रिकॉर्ड अउ ब्लड डोनर नेटवर्क गंभीर मरीज मन बर जीवनरक्षक साबित हो सकथें।
