कोरबा, पत्रकारिता जगत के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले कोरबा प्रेस क्लब के सत्र 2026-28 के चुनाव के परिणाम सोमवार को घोषित कर दिए गए। इस बार का चुनाव कई मायनों में खास रहा, जहां विभिन्न पदों पर कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। चुनाव परिणाम घोषित होते ही विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई और प्रेस क्लब परिसर में जीत का जश्न मनाया गया।
चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। मतदान में प्रेस क्लब के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता साफ दिखाई दी। चुनाव परिणामों ने कई नए समीकरण भी स्थापित किए, वहीं कुछ पुराने चेहरों पर सदस्यों ने दोबारा भरोसा जताया।
संरक्षक पद पर कमलेश यादव की शानदार जीत
संरक्षक पद के लिए हुए मुकाबले में कमलेश यादव ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए कुल 107 वोट हासिल किए और स्पष्ट जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी सनत दास दीवान को केवल 58 वोट मिले। इस जीत के साथ कमलेश यादव ने प्रेस क्लब के वरिष्ठ नेतृत्व में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
अध्यक्ष पद पर नौसाद खान को मिला सदस्यों का भरोसा
कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में नौसाद खान ने शानदार जीत हासिल की। उन्हें कुल 103 वोट प्राप्त हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राजेंद्र जास्वाल को 60 वोट मिले। चुनाव परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रेस क्लब के सदस्यों ने नौसाद खान के नेतृत्व और उनकी कार्यशैली पर विश्वास जताया है।
नौसाद खान की जीत के बाद समर्थकों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया और जीत की बधाइयों का सिलसिला देर तक चलता रहा। उन्होंने अपनी जीत को प्रेस क्लब के सभी सदस्यों की जीत बताते हुए संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
सचिव पद पर दिनेश राज का दूसरा कार्यकाल
इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला सचिव पद पर देखने को मिला। यहां दिनेश राज ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें कुल 100 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रंजन प्रसाद को 61 वोट प्राप्त हुए।
दिनेश राज की यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रेस क्लब के सदस्यों ने उनके पिछले कार्यकाल के कामकाज पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंपी है। चुनाव परिणाम आने के बाद समर्थकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
उपाध्यक्ष पद पर बहुकोणीय मुकाबले में राजकुमार शाह विजयी
उपाध्यक्ष पद के लिए इस बार चार उम्मीदवार मैदान में थे, जिसके कारण मुकाबला काफी रोचक हो गया था। अंततः राजकुमार शाह ने 59 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की।
अन्य उम्मीदवारों में:
- रामेश्वर ठाकुर को 39 वोट मिले।
- कृष्ण कुमार राठौर को 38 वोट प्राप्त हुए।
- पुरुषोत्तम दुबे को 25 वोट मिले।
चार प्रत्याशियों के बीच हुए इस मुकाबले ने चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया था।
उप सचिव पद पर हरीश तिवारी का कब्जा
उप सचिव पद के लिए हुए चुनाव में हरीश तिवारी ने 72 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। उनके मुकाबले में नीलम दास पड़वार को 46 वोट और रमेश वर्मा को 45 वोट मिले।
करीबी मुकाबले के बावजूद हरीश तिवारी ने निर्णायक बढ़त बनाए रखी और पद अपने नाम किया।
कोषाध्यक्ष पद पर दुर्गेश श्रीवास्तव की जीत
कोषाध्यक्ष पद के लिए भी तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ। इसमें दुर्गेश श्रीवास्तव ने 71 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
अन्य उम्मीदवारों में:
- वैभव शर्मा को 55 वोट मिले।
- संदीप शर्मा को 37 वोट प्राप्त हुए।
वित्तीय जिम्मेदारियों वाले इस महत्वपूर्ण पद पर दुर्गेश श्रीवास्तव की जीत को सदस्यों के विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।
कार्यकारिणी सदस्य के रूप में नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा और आकाश शर्मा निर्वाचित
कार्यकारिणी सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा और आकाश शर्मा निर्वाचित घोषित किए गए। ये तीनों आने वाले दो वर्षों तक प्रेस क्लब की नीतियों और गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नई टीम से बढ़ी उम्मीदें
चुनाव परिणामों के बाद कोरबा प्रेस क्लब में नई कार्यकारिणी के गठन के साथ पत्रकारों के बीच नई उम्मीदें भी जागी हैं। प्रेस क्लब से जुड़े सदस्यों का मानना है कि नव निर्वाचित टीम पत्रकार हितों की रक्षा, संगठन की मजबूती और पत्रकारिता के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगी।
विजयी प्रत्याशियों ने भी अपने संबोधन में सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर प्रेस क्लब और पत्रकार समुदाय के विकास के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने चुनाव में सहयोग करने वाले सभी सदस्यों और मतदान प्रक्रिया से जुड़े लोगों का धन्यवाद भी किया।
कोरबा प्रेस क्लब के इस चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संगठन के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। अब सभी की निगाहें नई कार्यकारिणी के आगामी कार्यों और योजनाओं पर टिकी हुई हैं।
