झीरम घाटी मामले की सुनवाई के बीच भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। जानिए उन्होंने कांग्रेस की राजनीति और मामले को लेकर क्या कहा।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी मामले को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मामले की सुनवाई के बीच भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से मामले को लेकर की जा रही बयानबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मामला अदालत में विचाराधीन है, तो राजनीतिक मंचों से उसके नतीजे को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं है। चंद्राकर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह झीरम घाटी जैसे बेहद संवेदनशील मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
अजय चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि यदि कांग्रेस पहले से ही यह मानकर चल रही है कि झीरम घाटी मामले में फैसला क्या आने वाला है, तो फिर अदालत की प्रक्रिया का इंतजार करने की जरूरत ही क्या है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यदि निर्णय पहले से ही पता है तो वह कांग्रेस भवन से ही फैसला सुना दे। भाजपा विधायक का यह बयान सामने आने के बाद झीरम घाटी मामले को लेकर प्रदेश की राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।
अदालत में विचाराधीन मामले पर राजनीति का आरोप
झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक राजनीतिक घटनाओं में शामिल है। इस घटना में प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। घटना के वर्षों बाद भी इसके पीछे की परिस्थितियों, साजिश और जिम्मेदार लोगों को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस जारी है।
इसी पृष्ठभूमि में अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि अदालत में किसी मामले की सुनवाई चल रही हो तो उसके तथ्यों और संभावित निर्णय पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह न्यायिक प्रक्रिया को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही है।
भाजपा विधायक के बयान का मुख्य केंद्र यही रहा कि झीरम घाटी जैसे संवेदनशील मामले में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय होने की प्रक्रिया को राजनीतिक दबाव या बयानबाजी से प्रभावित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
‘फैसला तय है तो कांग्रेस भवन से सुना दें’
अजय चंद्राकर का सबसे तीखा हमला उनके उस बयान को लेकर रहा जिसमें उन्होंने कांग्रेस की ओर से संभावित फैसले को लेकर किए जा रहे दावों पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को पहले से ही यह मालूम है कि मामले में क्या फैसला आने वाला है, तो वह अदालत के फैसले का इंतजार क्यों कर रही है।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि फैसला पहले से तय मान लिया गया है तो कांग्रेस भवन से ही निर्णय सुना देना चाहिए। उनके इस बयान को भाजपा की ओर से कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सीधा पलटवार माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में झीरम घाटी का मुद्दा बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इस मामले को लेकर सामने आने वाला प्रत्येक राजनीतिक बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बनता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही समय-समय पर झीरम घाटी मामले को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं।
महिलाओं की राजनीति को लेकर भी कांग्रेस पर पलटवार
अजय चंद्राकर ने कांग्रेस की ओर से भाजपा पर महिलाओं की राजनीति में हस्तक्षेप करने के लगाए जा रहे आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया कि कांग्रेस को भाजपा की राजनीति पर सवाल उठाने से पहले अपनी आंतरिक राजनीति पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को दूसरों के संगठन और राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करने से पहले अपने भीतर की परिस्थितियों को देखना चाहिए। चंद्राकर के इस बयान ने झीरम घाटी विवाद के साथ-साथ प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को भी चर्चा में ला दिया है।
उनके बयान से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय सीधे राजनीतिक जवाब देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। वहीं कांग्रेस की ओर से झीरम घाटी मामले को लेकर लगातार उठाए जा रहे सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं।
झीरम घाटी मामला क्यों है इतना संवेदनशील?

झीरम घाटी कांड 25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र में हुआ था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान हुए इस नक्सली हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं सहित सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग मारे गए थे। इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया था।
घटना के बाद से ही इसके पीछे की साजिश, सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक और हमले से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। समय के साथ यह मामला केवल कानून-व्यवस्था या नक्सली हिंसा का विषय नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान बन गया।
इसी वजह से झीरम घाटी मामले से जुड़ी किसी भी न्यायिक या राजनीतिक गतिविधि पर प्रदेश की नजर रहती है। पीड़ित परिवारों और राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी अपेक्षाएं और सवाल हैं। ऐसे में अदालत में चल रही कार्यवाही के बीच राजनीतिक बयान सामने आने से स्वाभाविक रूप से बहस बढ़ती है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच न्यायिक प्रक्रिया पर नजर
झीरम घाटी मामले में लंबे समय से न्याय की मांग उठती रही है। इस मामले से जुड़े लोगों के लिए न्यायिक प्रक्रिया केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे सवालों का जवाब पाने की उम्मीद भी है।
ऐसे में मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि अदालत में चल रही कार्यवाही अपने निर्धारित कानूनी ढांचे के तहत आगे बढ़े। किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और कानून के आधार पर तय किया जाता है।
अजय चंद्राकर ने अपने बयान के जरिए कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए मामले का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस लंबे समय से झीरम घाटी घटना को लेकर कई सवाल उठाती रही है। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी
झीरम घाटी मामले की सुनवाई के साथ ही प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे की सक्रियता बढ़ गई है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर का ताजा बयान इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा माना जा रहा है।
एक तरफ भाजपा कांग्रेस पर न्यायिक प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से मामले को लेकर उठाए जाने वाले सवालों के कारण राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर प्रदेश की नजर बनी रहेगी।
फिलहाल, अजय चंद्राकर के ‘कांग्रेस भवन से फैसला सुना दें’ वाले तंज ने झीरम घाटी मामले को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को एक नया मुद्दा दे दिया है। हालांकि, मामले का वास्तविक निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अदालत की कार्यवाही का इंतजार ही सबसे अहम रहेगा।
