जशपुर में आयोजित 5 दिवसीय आवासीय एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षण का सफल समापन। विद्यार्थियों ने विमान निर्माण, एयरोडायनामिक्स, एयरफॉइल, लिफ्ट, ड्रैग, थ्रस्ट और 3D वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से विमान संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
मुख्य समाचार जशपुरनगर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने तथा उन्हें आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने की दिशा में जशपुर जिला प्रशासन की एक सराहनीय पहल सफल रही। कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में संकल्प शिक्षण संस्थान, जशपुर में आयोजित 5 दिवसीय आवासीय एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। इस प्रशिक्षण ने जिले के विद्यार्थियों को केवल विमान बनाने की तकनीक ही नहीं सिखाई, बल्कि उन्हें विज्ञान के उन सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर भी दिया, जिनके आधार पर कोई भी विमान आकाश में उड़ान भरता है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता, नवाचार की भावना और आधुनिक तकनीकों के प्रति जिज्ञासा विकसित करना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर विज्ञान को प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से अनुभव किया।
40 विद्यार्थियों ने लिया प्रशिक्षण में हिस्सा

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा एवं जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिन्हा के निर्देशन में किया गया। इसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों से चयनित कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 40 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
पाँच दिनों तक चले इस आवासीय प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को विमानन विज्ञान (Aviation Science), एयरोडायनामिक्स (Aerodynamics) तथा एयरोमॉडलिंग के विभिन्न पहलुओं से विस्तारपूर्वक परिचित कराया गया। प्रशिक्षण को इस प्रकार तैयार किया गया था कि विद्यार्थी केवल सिद्धांत न सीखें, बल्कि उन्हें अपने हाथों से प्रयोग कर उनकी उपयोगिता भी समझ सकें।
उड़ान के पीछे छिपे विज्ञान को जाना
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि आखिर एक विमान हजारों फीट की ऊँचाई पर किस प्रकार संतुलित होकर उड़ता है। उन्हें विमान की संरचना, उसके विभिन्न हिस्सों की कार्यप्रणाली तथा उड़ान नियंत्रण प्रणाली की जानकारी दी गई।
इस दौरान विद्यार्थियों ने कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अवधारणाओं को विस्तार से समझा, जिनमें शामिल रहे—
- एयरफॉइल (Airfoil)
- लिफ्ट (Lift)
- ड्रैग (Drag)
- थ्रस्ट (Thrust)
- सेंटर ऑफ ग्रैविटी (Center of Gravity)
- संतुलन एवं स्थिरता
- आधुनिक विमानन तकनीक
प्रशिक्षकों ने इन अवधारणाओं को केवल कक्षा में समझाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि छोटे-छोटे प्रयोगों और मॉडल के माध्यम से विद्यार्थियों को इनका व्यावहारिक अनुभव भी कराया।
3D वर्चुअल रियलिटी से मिला कॉकपिट का अनुभव
इस प्रशिक्षण की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक रही 3D वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक का उपयोग। विद्यार्थियों को वर्चुअल रियलिटी उपकरणों के माध्यम से विमान के कॉकपिट का आभासी अनुभव कराया गया।
इस तकनीक की सहायता से विद्यार्थियों ने महसूस किया कि एक पायलट किस प्रकार विमान का संचालन करता है, उड़ान के दौरान विभिन्न उपकरण कैसे कार्य करते हैं तथा सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का पालन किस तरह किया जाता है।
ग्रामीण एवं अंचल क्षेत्रों के कई विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया और रोमांचक रहा। इससे उनके भीतर विमानन क्षेत्र के प्रति उत्सुकता और भी बढ़ी।
प्रयोगों के माध्यम से सीखी एयरोमॉडलिंग

प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक सुभाष देवांगन और राजेश राजपूत ने विद्यार्थियों को वायुगतिकी (Aerodynamics) के सिद्धांतों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रायोगिक सत्रों में विद्यार्थियों ने कई रोचक गतिविधियों में भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
- पेपर प्लेन निर्माण
- बूमरैंग तैयार करना
- एयरक्राफ्ट पज़ल्स हल करना
- विभिन्न प्रकार के एयरोमॉडल बनाना
- मॉडल विमान का संतुलन एवं नियंत्रण
- उड़ान परीक्षण (Flight Test)
इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समझा कि विमान निर्माण में छोटी-सी त्रुटि भी उसकी उड़ान को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी जाना कि सही संतुलन, भार वितरण और वायुगतिकीय संरचना किसी भी विमान की सफलता के लिए कितनी महत्वपूर्ण होती है।
विज्ञान को बनाया रोचक और आसान
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि विज्ञान जैसे विषय को कठिन सिद्धांतों की बजाय रोचक प्रयोगों, मॉडल निर्माण और प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इससे विद्यार्थियों ने न केवल नई बातें सीखीं बल्कि विज्ञान के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण विद्यार्थियों की समस्या समाधान क्षमता (Problem Solving Skills), तार्किक सोच (Logical Thinking), टीमवर्क तथा नवाचार की क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भविष्य के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए प्रेरणा
आज के समय में भारत अंतरिक्ष और विमानन क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ऐसे में स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों को एयरोस्पेस विज्ञान और आधुनिक तकनीकों से जोड़ना भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, रक्षा विशेषज्ञों तथा नवाचारकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही विज्ञान के व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ा जाए तो वे आगे चलकर अनुसंधान, रक्षा तकनीक, विमान निर्माण, ड्रोन टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बेहतर योगदान दे सकते हैं।
जिला प्रशासन की पहल बनी प्रेरणा
जशपुर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल एक कार्यशाला नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य में निवेश का प्रयास साबित हुआ। आधुनिक तकनीक, व्यवहारिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने वाली ऐसी पहलें विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर नई संभावनाओं की ओर प्रेरित करती हैं।
अभिभावकों और शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में जिले में विज्ञान एवं तकनीक आधारित ऐसे और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और कौशल विकास का लाभ मिल सके।
