कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। कोरबा जिला के जंगल इलाका म इंसान अउ वन्यजीव के बीच बढ़त नजदीकी के एक अउ घटना सामने आए हे। केंदई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत छिंदिया गांव म बुधवार, 29 जुलाई के एक भालू भोजन के तलाश म गांव के भीतर पहुंच गे। भालू गांव म घूमत-घूमत कटहल के पेड़ तक पहुंचिस अउ कटहल खाए के कोशिश करत-करत एक खुले कुआं म जा गिरिस।
बताय जा रहे हे कि कुआं करीब 25 फीट गहरा रहिस। गनीमत ये रहिस कि कुआं म गिरने के बाद भी भालू ला गंभीर चोट नइ आई। घटना के जानकारी मिलते ही गांव म हड़कंप मच गे। ग्रामीण मन तत्काल वन विभाग ला सूचना देइन। सूचना मिलते ही वन विभाग के टीम मौके म पहुंचिस अउ भालू ला सुरक्षित तरीका ले कुआं ले बाहर निकाले बर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करिस।
घंटों तक चले ए रेस्क्यू अभियान म वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मन के सूझबूझ अउ धैर्य के परीक्षा होइस। शुरुआत म भालू ला बाहर निकाले बर पारंपरिक तरीका अपनाय गिस, लेकिन कुआं के गहराई अउ डरे हुए भालू के व्यवहार के कारण सफलता नइ मिल सकिस। ए स्थिति म वन विभाग ह बिना समय गंवाए अपन रणनीति बदलिस अउ आखिरकार देर रात भालू ला सुरक्षित रूप ले कुआं ले बाहर निकाले म सफल होइस।
कटहल के लालच म कुआं तक पहुंचिस भालू
केंदई वन परिक्षेत्र के छिंदिया गांव जंगल के नजदीक बसे इलाका म शामिल हे। जंगल के आसपास बसे गांव मन म अक्सर वन्यजीव भोजन अउ पानी के तलाश म पहुंच जाथें। ए बार एक भालू गांव के भीतर पहुंचिस।
ग्रामीण मन के मुताबिक भालू कटहल खाए के लालच म गांव के तरफ आइस। कटहल के पेड़ के पास पहुंचके भालू भोजन के तलाश करत रहिस। ए दौरान अचानक ओकर पैर फिसल गे अउ वो करीब 25 फीट गहरे खुले कुआं म जा गिरिस।
भालू के कुआं म गिरने के बाद गांव के लोगन मन घटना के जानकारी वन विभाग तक पहुंचाइन। चूंकि भालू वन्यजीव हे अउ डरे हुए हालत म वो आक्रामक भी हो सकथे, ए कारण ग्रामीण मन ला कुआं के आसपास भीड़ नइ लगाए के समझाइस दी गिस।
वन विभाग के टीम ह मौके म पहुंचके पूरा स्थिति के जायजा लेइस अउ भालू ला बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकाले के योजना बनाइस।
पहिली कोशिश नाकाम, फिर वन विभाग ह बदलिस रणनीति
रेस्क्यू ऑपरेशन के शुरुआत म वन विभाग ह भालू ला बाहर निकाले बर पारंपरिक तरीका अपनाइस। लेकिन कुआं के गहराई जियादा रहिस अउ अंदर फंसे भालू डरे हुए रहिस। ए कारण पहिली कोशिश सफल नइ हो सकिस।
रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये रहिस कि भालू ला बाहर निकालना भी हे अउ ओकरा कोनो तरह के नुकसान भी नइ होना चाही। अगर भालू घबरा जाथे या तनाव म आ जाथे, त रेस्क्यू टीम अउ आसपास के लोगन बर खतरा पैदा हो सकथे।
स्थिति के गंभीरता ला समझत वन विभाग के अधिकारी मन तुरंत रणनीति बदलिन। टीम ह फैसला करिस कि भालू बर ऐसा रास्ता तैयार करे जाए, जिहां से वो अपन आप सुरक्षित रूप ले कुआं के बाहर आ सकय।
जेसीबी ले बनाय गिस कुआं म ढलाननुमा रास्ता
वन विभाग के टीम ह जेसीबी मशीन के मदद ले कुआं के एक हिस्सा के मिट्टी काटके ढलाननुमा रास्ता तैयार करिस। ए ढलान ला ए हिसाब ले बनाय गिस कि भालू ओकर सहारा लेके धीरे-धीरे ऊपर चढ़ सकय।
ढलान तैयार करे के बाद भालू ला कुआं के अंदर ले बाहर निकले के एक प्राकृतिक रास्ता मिल गे। एखर साथे रेस्क्यू टीम ह कुआं के भीतर बांस के एक मजबूत सीढ़ी भी उतारिस।
बांस के सीढ़ी भालू बर बाहर निकले के एक अउ विकल्प रहिस। टीम के कोशिश रहिस कि भालू अपन सुविधा अउ परिस्थिति के हिसाब ले ढलान या सीढ़ी के उपयोग करके खुदे बाहर आ जावय। ए तरीका अपनाए के पीछे मुख्य उद्देश्य भालू ला बिना बेहोश करे या बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकाले रहिस।
रेस्क्यू के दौरान ग्रामीण मन ला रखे गिस दूर
भालू के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन विभाग ह सुरक्षा के विशेष ध्यान रखिस। कुआं के आसपास ग्रामीण मन के भीड़ जमा हो सकत रहिस, लेकिन टीम ह लोगन ला घटनास्थल ले दूर रखिस।
वन विभाग के अधिकारी मन के मुताबिक रेस्क्यू के दौरान शांत वातावरण बनाए रखना बहुत जरूरी रहिस। अगर आसपास जियादा शोर-शराबा होथे या लोगन के भीड़ बढ़ जाथे, त भालू तनाव म आ सकथे अउ बाहर निकले के बजाय अउ घबरा सकथे।
ए कारण ग्रामीण मन ला कुआं ले दूर रखके पूरा इलाका ला शांत रखे गिस। रेस्क्यू टीम ह लगातार भालू के गतिविधि ऊपर नजर रखिस अउ सही मौका के इंतजार करिस।
रात करीब 11 बजे सफल होइस रेस्क्यू
वन विभाग के कई घंटा के मेहनत अउ इंतजार के बाद आखिरकार रेस्क्यू ऑपरेशन सफल होइस। रात करीब 11 बजे भालू ह कुआं ले बाहर निकले बर कोशिश करिस।
भालू ह बांस के सीढ़ी अउ तैयार करे गे ढलान के सहारा लेके ऊपर चढ़े के प्रयास करिस। आखिरकार वो कुआं ले बाहर निकले म सफल होइस अउ सीधे पास के सुरक्षित जंगल के तरफ निकल गे।
भालू के सुरक्षित जंगल पहुंचते ही वन विभाग के टीम अउ ग्रामीण मन राहत के सांस लेइन। ए रेस्क्यू ऑपरेशन म सबसे बड़ी राहत के बात ये रहिस कि भालू ला कोनो गंभीर चोट नइ आई अउ ओकरा बिना नुकसान पहुंचाए वापस जंगल म भेजे जा सकिस।
वन विभाग के टीम के सूझबूझ ले बचिस वन्यजीव के जान
ए पूरा रेस्क्यू अभियान म वन विभाग के टीम ह धैर्य अउ सूझबूझ के परिचय देइस। भालू ला सीधे पकड़के बाहर निकाले के बजाय टीम ह ऐसा रास्ता तैयार करिस, जिहां से वन्यजीव खुदे सुरक्षित तरीका ले बाहर निकल सकय।
ए तरीका वन्यजीव के सुरक्षा के नजरिया ले महत्वपूर्ण रहिस। वन विभाग के टीम ह भालू के व्यवहार ला ध्यान म रखके रणनीति तैयार करिस अउ लगातार स्थिति के निगरानी करत रहिस।
वन्यजीव मन के रेस्क्यू म जल्दबाजी कई बार नुकसानदायक साबित हो सकथे। ए कारण टीम ह सावधानी अउ धैर्य के साथ पूरा अभियान ला अंजाम देइस।
डीएफओ कुमार निशांत के निर्देशन म पूरा होइस अभियान
ए सफल रेस्क्यू अभियान कटघोरा के वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत के निर्देशन अउ उप वनमंडलाधिकारी संजय कुमार त्रिपाठी के मार्गदर्शन म पूरा करे गिस।
अभियान ला सफल बनाए म वन परिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक कुमार दुबे, वनपाल शारदा प्रसाद शर्मा, मंगल सिंह नायक, गंगाराम नेताम, अशोक कुमार श्रीवास, मुरारी लाल साहू, प्रहलाद सिदार सहित वन विभाग के कर्मचारी मन के महत्वपूर्ण भूमिका रहिस।
एखर अलावा हाथी मित्र दल के संदीप उइके अउ भोला यादव भी रेस्क्यू ऑपरेशन म सहयोग करिन। स्थानीय ग्रामीण मन भी वन विभाग के टीम के साथ सहयोग करत घटनास्थल म शांति बनाए रखिन अउ रेस्क्यू अभियान ला सफल बनाए म मदद करिन।
