रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान उर्वरक वितरण व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने राज्य में सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को वितरित किए जा रहे उर्वरकों के आंकड़ों में विरोधाभास होने का आरोप लगाया। वहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सदन में प्रस्तुत किए गए सभी आंकड़े विभागीय अभिलेखों पर आधारित और पूरी तरह तथ्यात्मक हैं।
प्रश्नकाल के दौरान दलेश्वर साहू ने सरकार से पूछा कि किसानों तक उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर अलग-अलग मंचों और विभागीय दस्तावेजों में अलग-अलग प्रतिशत बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर यह जानकारी दी गई है कि सहकारी समितियों के माध्यम से 48 प्रतिशत तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से 52 प्रतिशत उर्वरक वितरण किया गया, जबकि विभागीय जवाब में इससे अलग आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि आखिर वास्तविक स्थिति क्या है और दोनों आंकड़ों में इतना अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।
साहू ने सदन में कहा कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए। यदि वितरण के आंकड़ों में भ्रम रहेगा तो इसका सीधा असर किसानों के विश्वास और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए सही आंकड़े सदन और प्रदेश की जनता के सामने रखे जाएं।
इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विस्तृत जवाब देते हुए कहा कि विभाग की ओर से तीन पृष्ठों का विस्तृत उत्तर सदन में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसी प्रकार की विरोधाभासी जानकारी नहीं दी गई है और जो भी आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, वे आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में राज्य में उपलब्ध कुल उर्वरक भंडारण का लगभग 64 प्रतिशत सहकारी क्षेत्र के पास तथा 36 प्रतिशत निजी क्षेत्र के पास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा वितरण और भंडारण के अलग-अलग आंकड़ों को एक-दूसरे से जोड़कर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। दोनों की प्रकृति अलग है, इसलिए उनकी तुलना करना उचित नहीं है।
रामविचार नेताम ने यह भी कहा कि सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों में उर्वरकों की उपलब्धता पर नियमित निगरानी रखी जा रही है। जहां आवश्यकता होती है, वहां अतिरिक्त आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कुछ समय तक तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार से आंकड़ों की स्पष्टता की मांग दोहराई, जबकि सत्ता पक्ष ने विभागीय उत्तर को पूरी तरह सही और प्रमाणिक बताया। हालांकि मंत्री के विस्तृत जवाब के बाद प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आंकड़ों की स्पष्टता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। उर्वरकों की समय पर उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और वास्तविक भंडारण की जानकारी किसानों तक सही रूप में पहुंचना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो और कृषि कार्य प्रभावित न हो।
छत्तीसगढ़ी समाचार (देवनागरी लिपि)
विधानसभा मं खाद वितरण के आंकड़ा ऊपर गरमाइस बहस, सरकार अउ विपक्ष आमने-सामने
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र मं प्रश्नकाल के दौरान खाद (उर्वरक) वितरण व्यवस्था ला लेके सत्ता पक्ष अउ विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखे ला मिलिस। कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू सहकारी समिति अउ निजी विक्रेता मन के माध्यम ले होवत खाद वितरण के आंकड़ा ऊपर सवाल उठाइन अउ सरकार ऊपर अलग-अलग जानकारी देय के आरोप लगाइन।
दलेश्वर साहू कहिन कि विभाग ले मिले जानकारी मं विरोधाभास दिखत हे। एक जगह सहकारी समिति मन के माध्यम ले 48 प्रतिशत अउ निजी विक्रेता मन के माध्यम ले 52 प्रतिशत खाद वितरण के बात कहे गे हे, जबकि विभागीय जवाब मं अलग आंकड़ा देय गे हे। ओमन सरकार ले पूछिन कि आखिर सही आंकड़ा का हे अउ ए अंतर काबर आय?
ए ऊपर कृषि मंत्री रामविचार नेताम जवाब देत कहिन कि विभाग के तरफ ले तीन पन्ना के विस्तृत जवाब विधानसभा मं प्रस्तुत करे गे हे। ओमन स्पष्ट करिन कि सरकार के तरफ ले कोनो विरोधाभासी जानकारी नई देय गे हे अउ सदन मं रखे गे सब्बो आंकड़ा आधिकारिक रिकॉर्ड ऊपर आधारित हे।
मंत्री बताइन कि अभी राज्य मं उपलब्ध कुल खाद भंडारण के लगभग 64 प्रतिशत सहकारी क्षेत्र अउ 36 प्रतिशत निजी क्षेत्र के पास मौजूद हे। ओमन कहिन कि भंडारण अउ वितरण के आंकड़ा अलग-अलग विषय हवंय, एला एक-दूसर ले जोड़के भ्रम फैलाना ठीक नई हे।
रामविचार नेताम कहिन कि सरकार के प्राथमिकता किसान मन ला समय मं पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना हे। खरीफ सीजन ला देखते हुए जिला स्तर मं लगातार निगरानी रखे जात हे अउ जरूरत पड़ने ऊपर अतिरिक्त खाद घलो भेजे जात हे।
बहस के दौरान सत्ता पक्ष अउ विपक्ष के बीच कुछ देर तक नोकझोंक घलो होइस, फेर मंत्री के विस्तृत जवाब के बाद प्रश्नकाल के कार्यवाही आगू बढ़ाइस गीस।
