रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । एक जमाना रहिस जब छत्तीसगढ़ के पहचान सिरिफ धान के कटोरा अऊ खनिज संपदा तक सीमित माने जावत रहिस। फेर अब हालात बदलत दिखत हवय। खेल के मैदान मं राज्य के बेटा-बेटी मन अपन मेहनत, लगन अऊ हुनर के दम मं नई इतिहास रचत हवंय। हॉकी, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी अऊ पारंपरिक खेल मन मं छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी अब राष्ट्रीय अऊ अंतरराष्ट्रीय मंच मं अपन मजबूत पहचान बना रहल हवंय।
पिछला कुछ साल मं राज्य सरकार अऊ खेल विभाग के पहल ले गांव-गांव मं खेल के माहौल बनत दिखत हवय। “खेल छत्तीसगढ़ अभियान” के माध्यम ले छोटे-छोटे गांव ले निकरत प्रतिभा मन ला बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधा अऊ प्रतियोगिता के मंच मिलत हवय। एही के नतीजा आय कि आज प्रदेश के खिलाड़ी देशभर मं अपन प्रदर्शन ले सबके ध्यान खींचत हवंय।
हॉकी मं अब घलो बरकरार हे छत्तीसगढ़ के दबदबा
हॉकी के बात होय अऊ छत्तीसगढ़ के नाम नई आवय, अइसने होए नई सकय। सरगुजा, जशपुर अऊ रायगढ़ जइसने इलाका बरसों ले देश ला बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी देत आथें।
हाल के राष्ट्रीय प्रतियोगिता मन मं घलो प्रदेश के पुरुष अऊ महिला टीम दमदार खेल दिखाइस। महिला टीम के कप्तान सुमन बेक जइसने खिलाड़ी मन अपन शानदार प्रदर्शन ले प्रदेश के गौरव बढ़ाइन। जशपुर के कुनकुरी मं बने एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान अब ग्रामीण प्रतिभा मन बर वरदान साबित होत हवय, जिहां हर महीना सैकड़ों बच्चे नि:शुल्क प्रशिक्षण लेत हवंय।
राज्य सरकार के “एक ब्लॉक, एक हॉकी अकादमी” योजना घलो धीरे-धीरे आकार लेवत हवय। ए योजना के मकसद गांव के प्रतिभाशाली खिलाड़ी मन ला घर के नजदीक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना हवय।
तीरंदाजी मं आदिवासी प्रतिभा मन के चमकत भविष्य
बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा अऊ कांकेर जइसने वनांचल इलाका मं तीर-कमान सिरिफ खेल नई, बल्कि संस्कृति के हिस्सा आय। अब ए पारंपरिक हुनर ला आधुनिक प्रशिक्षण के संग जोड़े जावत हवय।
सुकमा के किसान परिवार ले निकरे प्रतिभाशाली खिलाड़ी ज्योति कुमारी जइसने युवा मन आज राष्ट्रीय स्तर मं पदक जीतके प्रदेश के नाम रोशन करत हवंय। जगदलपुर मं बने हाई परफॉर्मेंस तीरंदाजी सेंटर अऊ जिला स्तर के क्लब मन के कारण हजारों बच्चे नियमित प्रशिक्षण लेत हवंय।
खेल विशेषज्ञ मन के मानना हवय कि अगर अइसने सुविधा मिलत रहिस, त आने वाला समय मं छत्तीसगढ़ ले ओलंपिक स्तर के तीरंदाज घलो निकल सकथें।
एथलेटिक्स अऊ फुटबॉल मं नई पीढ़ी के तेज रफ्तार
रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर अऊ कोरबा जइसने जिला मन मं आधुनिक ट्रैक अऊ खेल मैदान बनाय जाय के बाद एथलेटिक्स मं घलो उल्लेखनीय सुधार देखे ला मिलत हवय।
प्रदेश के युवा धावक मन राष्ट्रीय प्रतियोगिता मं लगातार बेहतर प्रदर्शन करत हवंय। फुटबॉल मं घलो अंडर-17 टीम के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना ए बात के संकेत आय कि अब छत्तीसगढ़ सिरिफ पारंपरिक खेल तक सीमित नइ रहिगे।
राज्य सरकार हर जिला मं आधुनिक 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक तैयार करे के दिशा मं काम करत हवय, जेन ले ग्रामीण खिलाड़ी मन ला घलो बेहतर अभ्यास के अवसर मिलही।
पारंपरिक खेल मन ला मिलत हे नई पहचान
गेड़ी दौड़, खो-खो, कबड्डी, भौंरा अऊ गिल्ली-डंडा जइसने खेल मन छत्तीसगढ़ के संस्कृति के अहम हिस्सा हवंय। अब ए खेल मन ला घलो संगठित रूप ले बढ़ावा देय जात हवय।
राज्य स्तरीय आदिवासी खेल महोत्सव मं हजारों खिलाड़ी भाग लेथें। स्कूल स्तर मं घलो हर सप्ताह पारंपरिक खेल खेलाय के पहल ले ग्रामीण बच्चा मन मं अपन संस्कृति प्रति गर्व बढ़त हवय।
खो-खो अऊ कबड्डी मं छत्तीसगढ़ के महिला खिलाड़ी मन लगातार राष्ट्रीय स्तर मं शानदार प्रदर्शन करत हवंय।
खेल सुविधा मं लगातार होवत हे विस्तार
राज्य मं खेल अधोसंरचना ऊपर लगातार निवेश बढ़त हवय। रायपुर के मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, जगदलपुर के ट्राइबल स्पोर्ट्स हॉस्टल, कोरबा के वेटलिफ्टिंग अऊ बॉक्सिंग अकादमी जइसने परियोजना मन युवा खिलाड़ी मन बर नई उम्मीद बनके सामने आइन हवंय।
अइसने सुविधा के कारण दूर-दराज गांव ले आइस प्रतिभा मन ला रहई, पढ़ई, खान-पान अऊ प्रशिक्षण एके जगह मिलत हवय, जेन ले ओमन अपन पूरा ध्यान खेल ऊपर लगा सकत हवंय।
सरकारी योजना मन ले बढ़त हे खिलाड़ियों के हौसला
पहिली खेल ला अपन करियर बनाय मं आर्थिक परेशानी सबसे बड़े बाधा रहिस। अब सरकार के अलग-अलग योजना मन ले ए स्थिति मं बदलाव दिखत हवय।
राष्ट्रीय अऊ अंतरराष्ट्रीय स्तर मं पदक जीतइया खिलाड़ी मन ला सम्मान राशि, छात्रवृत्ति, डाइट भत्ता, सरकारी नौकरी अऊ पेंशन जइसने सुविधा उपलब्ध कराय जात हवय। ए पहल ले गरीब परिवार के प्रतिभाशाली युवा मन घलो बिना आर्थिक चिंता के खेल मं अपन भविष्य बना सकत हवंय।
चुनौती अभी घलो बाकी हे
हालांकि खेल के क्षेत्र मं तेजी ले विकास होवत हवय, फेर कुछ चुनौती अभी घलो बने हवय। ग्रामीण इलाका मं प्रशिक्षित कोच के कमी, संतुलित पोषण के अभाव अऊ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के अनुभव अभी घलो बड़े मुद्दा हवंय।
खेल विशेषज्ञ मन के कहना हवय कि अगर कोचिंग, न्यूट्रिशन अऊ विदेशी एक्सपोजर ऊपर लगातार काम होवत रहिस, त आने वाला समय मं छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी खेल राज्य मन मं शामिल हो सकथे।
गांव के माटी ले निकलत प्रेरणा के कहानी
सुकमा के एक छोटे गांव ले निकरे तीरंदाज होवय, रायगढ़ के गांव के हॉकी खिलाड़ी होवय या दुर्ग के युवा धावक—इन सबो कहानी ए बात ला साबित करथे कि प्रतिभा के कमी नई, अवसर के जरूरत हवय।
आज जऊन बच्चा कभी साधन के अभाव मं खेलत रहिन, वो मन आधुनिक प्रशिक्षण अऊ बेहतर सुविधा के दम मं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचत हवंय। ए बदलाव सिरिफ खेल के नइ, बल्कि समाज के सोच मं घलो बदलाव के संकेत आय।
आने वाला समय छत्तीसगढ़ खेल बर हो सकथे सुनहरा
राज्य सरकार के लक्ष्य हर विकासखंड मं मिनी स्टेडियम, हजारों स्कूल मं खेल सामग्री, महिला खिलाड़ी मन के संख्या बढ़ाय अऊ पैरा स्पोर्ट्स ला मजबूत बनाय हवय। अगर ए योजना समय मं पूरा होथे, त आने वाला कुछ साल मं छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खेल राज्य मन मं अपन मजबूत जगह बना सकथे।
खेल विशेषज्ञ मन के कहना हवय कि छत्तीसगढ़ के माटी मं प्रतिभा के कमी नई हवय। जरूरत सिरिफ सही मार्गदर्शन, बेहतर सुविधा अऊ लगातार अवसर देय के हवय। जेन रफ्तार ले प्रदेश आगे बढ़त हवय, ओकर ले साफ दिखत हवय कि अब गांव के मैदान ले निकरे खिलाड़ी मन देश अऊ दुनिया के मंच मं छत्तीसगढ़ के तिरंगा लहराय बर पूरी तरह तैयार हवंय।
