रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा पूरे सदन में छाया रहा। सक्ती जिले में स्थित वेदांता प्लांट में हुए हादसे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने औद्योगिक इकाइयों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं, सुरक्षा मानकों के पालन और दोषियों पर की गई कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा। चर्चा के दौरान वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम भी सदन में गूंजा। जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
यह मामला केवल एक औद्योगिक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य में औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिकों के अधिकार, सेफ्टी ऑडिट की प्रभावशीलता और दुर्घटनाओं के बाद जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा का केंद्र बन गया।
वेदांता प्लांट हादसे का मुद्दा सदन में उठा
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार से पूछा कि पिछले वर्षों में राज्य की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में कितनी दुर्घटनाएं हुईं, उनमें कितने लोगों की मृत्यु हुई, कितने श्रमिक घायल हुए और सरकार ने दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की।
उन्होंने विशेष रूप से सक्ती जिले के सिंघितराई स्थित वेदांता प्लांट में हुए हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दुर्घटना में 25 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं था, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना थी।
अनिल अग्रवाल का नाम लेकर पूछे सवाल
डॉ. चरणदास महंत ने सदन में कहा कि वेदांता हादसे के मामले में दर्ज एफआईआर में कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित अन्य लोगों के नाम का उल्लेख होने की बात सामने आई थी। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी कि जांच वर्तमान में किस स्तर पर है, किन-किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और क्या जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है या नहीं।
उद्योग मंत्री ने दिया सरकार का जवाब
सरकार की ओर से उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन को जानकारी दी कि राज्य में दर्ज औद्योगिक दुर्घटनाओं के मामलों को गंभीरता से लिया गया है।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार राज्य में पांच प्रमुख औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं और सभी मामलों में संबंधित विभागों द्वारा सेफ्टी ऑडिट कराया गया है। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।
मंत्री ने कहा कि सक्ती जिले के सिंघितराई स्थित वेदांता लिमिटेड मामले में अरुण मिश्रा, योगेंद्र पटेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कानून के अनुसार आगे बढ़ रही है और जांच एजेंसियां अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं।
सेफ्टी ऑडिट पर भी उठे सवाल
बहस के दौरान विपक्ष ने यह सवाल भी उठाया कि यदि औद्योगिक इकाइयों में नियमित रूप से सेफ्टी ऑडिट कराए जाते हैं, तो फिर इतनी बड़ी दुर्घटनाएं कैसे हो जाती हैं।
विपक्ष का कहना था कि केवल औपचारिक सेफ्टी ऑडिट पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा मानकों का वास्तविक पालन, श्रमिकों को प्रशिक्षण, आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मशीनों की नियमित जांच, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ और समय-समय पर अभ्यास (मॉक ड्रिल) दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
औद्योगिक विकास के साथ सुरक्षा भी जरूरी
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल है। यहां इस्पात, ऊर्जा, सीमेंट, खनन और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन उद्योगों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बने। किसी भी दुर्घटना का सबसे बड़ा असर श्रमिकों और उनके परिवारों पर पड़ता है। इसलिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन केवल कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
कांग्रेस का वॉकआउट
उद्योग मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष ने कहा कि सरकार ने उनके सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। विशेष रूप से जांच की वर्तमान स्थिति और वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही तय करने को लेकर विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा।
इसी के विरोध में कांग्रेस विधायक सदन से वॉकआउट कर गए। वॉकआउट के दौरान विपक्ष ने औद्योगिक सुरक्षा और हादसे में मृत श्रमिकों को न्याय दिलाने की मांग दोहराई।
आगे क्या?
वेदांता प्लांट हादसे का मुद्दा विधानसभा में उठने के बाद एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाती हैं और यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है, तो कानून के अनुसार क्या कार्रवाई की जाती है।
विधानसभा में हुई इस चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक दुर्घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और उद्योगों में सुरक्षा संस्कृति से जुड़ा व्यापक मुद्दा हैं। आने वाले समय में सरकार, उद्योग प्रबंधन और नियामक एजेंसियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे सुरक्षा मानकों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
