रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र मं बुधवार के कार्यवाही किसान मन के खाद, बीज अउ बिजली संकट के मुद्दा ऊपर गरमागर्मी के बीच चले। प्रदेश भर मं खेती-किसानी के मौसम चलत होय के बीच कांग्रेस विधायक दल सरकार ला घेरत दिखिस। विपक्ष के आरोप रहिस कि किसान मन डीएपी खाद बर सहकारी समिति ले लेके सरकारी दफ्तर तक चक्कर काटत हें, फेर जरूरत के हिसाब ले खाद उपलब्ध नइ होवत हे। ए मुद्दा ला लेके कांग्रेस विधानसभा मं तत्काल चर्चा कराय के मांग करत स्थगन प्रस्ताव पेश करिस, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह प्रस्ताव ला नियम के आधार मं अस्वीकार कर दीन।
प्रस्ताव खारिज होय के बाद सदन के माहौल गरमा गे। विरोध जतावत कांग्रेस विधायक मन अपन सीट छोड़के विधानसभा के वेल मं उतरिन अउ सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दीन। विधानसभा के नियम मुताबिक वेल मं आके कार्यवाही बाधित करे के स्थिति मं सदस्य मन स्वतः निलंबित माने जाथें। ए नियम के तहत सभी विरोध प्रदर्शन करत कांग्रेस विधायक स्वतः निलंबित होगे।
किसान मन के समस्या ला लेके चर्चा के मांग
मानसून के समय खेती-किसानी चरम मं रहिथे अउ ए बखत खाद, बीज अउ बिजली किसान मन बर सबसे जरूरी संसाधन होथे। कांग्रेस के कहना रहिस कि प्रदेश के कई जिला मं किसान मन समय पर डीएपी खाद नइ पा सकत हें, जेन ले बोनी अउ फसल प्रभावित होवत हे।
एही बात ला ध्यान मं रखत कांग्रेस विधायक दल स्थगन प्रस्ताव के माध्यम ले सदन के सामान्य कार्यवाही रोकके किसान मन के समस्या ऊपर तत्काल चर्चा कराय के मांग करिस। विपक्ष के तर्क रहिस कि ए मामला लाखों किसान मन ले जुड़े हे, ए कारण एला प्राथमिकता देय जाना चाही।
अध्यक्ष के फैसला, प्रस्ताव होइस खारिज
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह प्रस्ताव के परीक्षण के बाद कहिन कि प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव विधानसभा के नियम के अनुरूप नइ हे, ए कारण एला स्वीकार नइ करे जा सकय।
अध्यक्ष के फैसला आवतिच विपक्षी विधायक मन नाराज होगे अउ सदन मं विरोध जताय बर वेल मं उतर गेन। कुछ देर तक नारेबाजी चलते रहिस, जेन ले सदन के कार्यवाही प्रभावित होइस।
नियम मुताबिक स्वतः निलंबित होगे विधायक
विधानसभा के प्रक्रिया अउ कार्य संचालन नियम मं स्पष्ट प्रावधान हे कि अगर सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने वेल मं उतरके कार्यवाही बाधित करथें, त ओमन ऊपर स्वतः निलंबन के प्रावधान लागू होथे।
एही नियम के तहत विरोध प्रदर्शन करत कांग्रेस विधायक मन स्वतः निलंबित होगे। ए घटनाक्रम के बाद सदन मं कुछ देर तक राजनीतिक माहौल गरम बने रहिस।
भूपेश बघेल के सरकार ऊपर गंभीर आरोप
शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किसान मन के समस्या ला उठावत सरकार ऊपर कई गंभीर आरोप लगाइन।
ओमन कहिन कि प्रदेश के किसान डीएपी खाद बर एक समिति ले दूसर समिति तक भटकत हें। कई जगह सहकारी समिति मं खाद उपलब्ध नइ हे, जबकि निजी दुकान मन मं ओही खाद बिकत दिखत हे। ए स्थिति ले किसान मन के मन मं सवाल उठत हे कि सरकारी व्यवस्था आखिर कहां कमजोर पड़त हे।
भूपेश बघेल के मुताबिक खेती के समय खाद के कमी किसान मन बर सबसे बड़ा संकट बन सकथे, काबर समय निकल जाय के बाद खाद के उपलब्धता के कोई खास फायदा नइ रहि जाथे।
बिजली कटौती अउ खंड वर्षा ऊपर घलो जताइस चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री सिरिफ खाद तक सीमित नइ रहिन। ओमन प्रदेश मं होवत खंड वर्षा अउ बार-बार बिजली कटौती ला घलो खेती बर गंभीर चुनौती बताइन।
ओमन कहिन कि कई इलाका मं पर्याप्त बरसात नइ होय के कारण किसान सिंचाई बर बिजली ऊपर निर्भर हें। अइसने समय मं अगर बिजली के आपूर्ति बाधित होही, त फसल के नुकसान हो सकथे अउ किसान मन आर्थिक संकट मं फंस सकथें।
सरकार के सामने कई चुनौती
खेती-किसानी के मौसम मं खाद, बीज अउ बिजली के समय पर उपलब्धता सरकार बर सबसे बड़ी जिम्मेदारी माने जाथे। कृषि विशेषज्ञ मन के मुताबिक डीएपी खाद धान सहित कई फसल के शुरुआती विकास बर महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे। अगर किसान मन ला समय पर खाद नइ मिलय, त उत्पादन ऊपर असर पड़ सकथे।
एही कारण ले विपक्ष लगातार सरकार ले मांग करत हे कि खाद वितरण व्यवस्था ला मजबूत करे जावय, सहकारी समिति मन मं पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराय जावय अउ बिजली आपूर्ति मं सुधार लाय जावय।
राजनीतिक माहौल गरमाय
मानसून सत्र के शुरुआती दिन लेच सत्ता पक्ष अउ विपक्ष के बीच कई मुद्दा ऊपर तीखी नोकझोंक देखे ला मिलत हे। खाद संकट के मुद्दा घलो ए राजनीतिक टकराव के प्रमुख कारण बनिस।
एक ओर विपक्ष किसान मन के समस्या ला लेके सरकार ला घेरत हे, त दूसर ओर सरकार अपन व्यवस्था ला बेहतर बतावत विपक्ष के आरोप ला खारिज करत हे। आने वाले दिन मं ए मुद्दा ऊपर विधानसभा के भीतर अउ बाहर राजनीतिक बहस अउ तेज होय के संभावना हे।
किसान मन के नजर अब समाधान ऊपर
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे अधिक उम्मीद किसान मन के हे। किसान चाहत हें कि खाद, बीज अउ बिजली जइसन बुनियादी जरूरत समय पर पूरा होवय, ताकि खेती के काम प्रभावित नइ होय।
विधानसभा मं उठे ए मुद्दा ले साफ हे कि किसान मन के समस्या अब राजनीतिक चर्चा के केंद्र मं आ गे हे। अब देखना ए रहिही कि सरकार ए विषय मं का कदम उठाथे अउ किसान मन ला राहत देय बर का नई व्यवस्था लागू करे जाथे।
