Korba (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । भगवान जगन्नाथ के पावन रथयात्रा ला लेके पूरा जिला अब भक्तिमय माहौल मं रंगाय दिखत हे। ओडिशा के प्रसिद्ध पुरी रथयात्रा के तर्ज मं जिला के अलग-अलग गांव अउ नगर मं भव्य आयोजन के तैयारी अंतिम चरण मं पहुंच गे हे। मंदिर परिसर मन मं साफ-सफाई, रथ सजावट, पूजा-पाठ अउ श्रद्धालु मन बर जरूरी व्यवस्था तेजी ले चलत हे। आयोजन समिति मन के सदस्य, स्वयंसेवक अउ ग्रामीण मन मिलके ए धार्मिक महापर्व ला यादगार बनाय बर दिन-रात मेहनत करत हें।
ए साल 16 जुलाई ला जिला के 6 अलग-अलग स्थान ले भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलदाऊ (बलभद्र) अउ बहिनी सुभद्रा के भव्य रथयात्रा निकारे जाही। हजारों श्रद्धालु मन रथ ला खींचके भगवान के दर्शन करहीं अउ धार्मिक परंपरा के निर्वाह करहीं।
ज्वर लीला के बाद भगवान निकलहीं भक्त मन के बीच
धार्मिक मान्यता के मुताबिक भगवान जगन्नाथ अभी ज्वर लीला मं हें। स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाथें अउ कुछ दिन तक विश्राम करथें। ए अवधि ला अनासर काल कहे जाथे। ए समय मं मंदिर के गर्भगृह मं विशेष सेवा अउ उपचार के परंपरा निभाय जाथे।
मान्यता हे कि स्वस्थ होय के बाद भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलदाऊ अउ बहिनी सुभद्रा संग रथ मं विराजमान होके भक्त मन ला दर्शन देवत हें। एही पावन अवसर ला रथयात्रा के रूप मं मनाय जाथे।
6 जगह ले निकलही रथयात्रा, 3 जगह भगवान रहिहीं नौ दिन
ए साल जिला मं कुल 6 स्थान ले भगवान के रथयात्रा निकरही। एमा सबसे खास बात ये हे कि सिरिफ 3 रथयात्रा मं भगवान प्रतीकात्मक रूप ले अपन मौसी घर जाहीं, जिहां ओमन पूरे 9 दिन तक विश्राम करहीं।
बाकी 3 स्थान मं भगवान के रथयात्रा त निकलही, फेर उहां भगवान सिरिफ एक रात विश्राम करहीं अउ धार्मिक परंपरा के मुताबिक अगला दिन मंदिर वापस ले जाहीं।
धार्मिक जानकार मन के मुताबिक, ए परंपरा बरसों ले निभाय जात हे अउ हर गांव अपन-अपन रीति-रिवाज के अनुसार रथयात्रा के आयोजन करथे।
दादर गांव मं दिखही सबसे ज्यादा उत्साह
जिला के दादर गांव के रथयात्रा दूर-दूर तक प्रसिद्ध माने जाथे। हर साल हजारों श्रद्धालु ए रथयात्रा मं शामिल होथें। ए बार घलो आयोजन समिति महीना भर ले तैयारी मं जुटे हे।
गांव के मंदिर परिसर मं रथ के सजावट, मार्ग के साफ-सफाई, बिजली व्यवस्था, पेयजल, श्रद्धालु मन बर बैठक व्यवस्था अउ सुरक्षा के विशेष इंतजाम करे जात हे।
आयोजन समिति के सदस्य मन बताइन कि भगवान ला विशेष भोग अर्पित करे के बाद श्रद्धालु मन बर महाप्रसाद वितरण के व्यवस्था देर सांझ तक रहिही, ताकि दूर-दराज ले आवत भक्त मन आसानी ले प्रसाद ग्रहण कर सकंय।
मौसी घर मं होही विशेष पूजा-अर्चना
रथयात्रा पूरा होय के बाद भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ अउ सुभद्रा प्रतीकात्मक रूप ले मौसी घर पहुंचहीं। धार्मिक मान्यता अनुसार भगवान ए जगह कुछ दिन विश्राम करथें।
ए अवधि मं रोजाना विशेष पूजा, आरती, भजन-कीर्तन, संध्या आराधना अउ सेवा कार्यक्रम आयोजित होही। गांव-गांव ले श्रद्धालु पहुंचके भगवान के दर्शन करहीं अउ परिवार के सुख-समृद्धि, अच्छी फसल अउ खुशहाली बर प्रार्थना करहीं।
भक्त मन के मुताबिक, मौसी घर मं भगवान के दर्शन करे ले विशेष पुण्य के प्राप्ति होथे अउ मनोकामना पूरी होथे।
25 जुलाई ला निकलही वापसी रथयात्रा
भगवान जगन्नाथ के विश्राम काल पूरा होय के बाद 25 जुलाई, देवशयनी एकादशी के शुभ अवसर मं भगवान के वापसी रथयात्रा निकारे जाही।
जिला के जिहां-जिहां भगवान नौ दिन तक विश्राम करहीं, उहां वापसी यात्रा के दौरान घलो भारी भीड़ जुटे के संभावना हे। श्रद्धालु मन पारंपरिक वाद्ययंत्र, भजन-कीर्तन अउ जयकारा लगावत भगवान के रथ ला मंदिर तक पहुंचाहीं।
धार्मिक दृष्टि ले वापसी रथयात्रा के महत्व घलो उतकेच माने जाथे, जेनती पहिली यात्रा के।
रथ खींचे के धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म मं भगवान जगन्नाथ के रथ खींचना अत्यंत शुभ माने जाथे। मान्यता हे कि भगवान के रथ ला हाथ लगाके या रस्सा खींचके श्रद्धालु अपन जीवन के अनेक दुख-दर्द ले मुक्ति पाथें अउ परिवार मं सुख-समृद्धि के आशीर्वाद मिलथे।
एही कारण ले हर उमर के श्रद्धालु—बुजुर्ग, युवा, महिला अउ छोटे-छोटे लइका घलो रथ खींचे बर उत्साहित रहिथें।
प्रशासन अउ आयोजन समिति के विशेष तैयारी
बढ़त भीड़ ला देखते प्रशासन अउ आयोजन समिति सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करत हे। रथयात्रा मार्ग मं पुलिस बल, स्वयंसेवक, स्वास्थ्य टीम, पेयजल, यातायात नियंत्रण अउ आपातकालीन सहायता के व्यवस्था कराय जात हे।
आयोजन समिति श्रद्धालु मन ले अपील करे हे कि रथयात्रा मं अनुशासन बनाय रखंय, प्रशासन के निर्देश के पालन करंय अउ धार्मिक आयोजन के गरिमा ला बनाए रखंय।
आस्था, परंपरा अउ संस्कृति के संगम
भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा सिरिफ एक धार्मिक आयोजन नइ, बल्कि समाज ला जोड़इया संस्कृति अउ आस्था के महापर्व आय। ए दिन अलग-अलग समाज, गांव अउ परिवार के लोगन एकजुट होके भगवान के सेवा मं सहभागी बनथें।
जिला मं होवत ए भव्य आयोजन एक बार फेर साबित करही कि छत्तीसगढ़ के धरती मं धार्मिक परंपरा, लोक संस्कृति अउ सामूहिक सहभागिता के परंपरा आज घलो उतकेच मजबूत हे, जेनकर मिसाल हर साल भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा मं देखे ला मिलथे।
