छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण नल-जल योजनाओं का संचालन ग्राम पंचायतों को सौंपने की तैयारी। मुख्य सचिव विकासशील ने सोशल ऑडिट, जल गुणवत्ता और हर घर शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत संचालित ग्रामीण नल-जल योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव के लिए नई नीति तैयार की जा रही है। इसी संबंध में शुक्रवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग और जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) नीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नल-जल योजनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक प्रतिदिन सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल नियमित रूप से पहुंचे। इसके लिए शासन की योजनाओं को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मंथन किया गया।
ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी नल-जल योजनाओं की जिम्मेदारी
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपने का रहा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में निर्मित सभी ग्रामीण पेयजल योजनाओं का संचालन शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाए और इन्हें चरणबद्ध तरीके से ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया तेज की जाए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायतों की भागीदारी बढ़ने से योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी होगा और लोगों की समस्याओं का समाधान भी तेजी से हो सकेगा। पंचायतों को इस जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां निभाएंगी अहम भूमिका
सरकार की नई रणनीति के अनुसार, नल-जल योजनाओं के रखरखाव और नियमित संचालन की जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) के माध्यम से निभाई जाएगी। इन समितियों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीणों की सीधी सहभागिता सुनिश्चित होगी और योजनाओं की निगरानी भी स्थानीय स्तर पर बेहतर तरीके से हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी योजना की जिम्मेदारी स्थानीय समुदाय के हाथों में होती है, तो उसके लंबे समय तक सफल रहने की संभावना भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि सरकार इस मॉडल को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दे रही है।
हर घर तक रोज पहुंचे शुद्ध पानी, बनेगी व्यापक रणनीति
मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों से कहा कि केवल पाइपलाइन बिछाना पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो।
इसके लिए उन्होंने विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें जल स्रोतों की उपलब्धता, पाइपलाइन नेटवर्क का रखरखाव, जल गुणवत्ता की नियमित जांच, बिजली आपूर्ति और आपातकालीन मरम्मत जैसी व्यवस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा।
सोशल ऑडिट और ग्राम सभा की निगरानी होगी अनिवार्य
बैठक में योजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) को अनिवार्य बनाने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्रामीण पेयजल योजना का समय-समय पर सोशल ऑडिट कराया जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण पानी मिल रहा है और योजनाओं का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहा है।
इसके साथ ही प्रत्येक ग्राम सभा में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल व्यवस्था की समीक्षा और चर्चा अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश भी दिए गए। इससे ग्रामीण स्वयं अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे पंचायत के सामने रख सकेंगे।
वाटर मीटर और वित्तीय व्यवस्था पर भी हुआ मंथन
बैठक के दौरान ग्रामीण पेयजल योजनाओं की वित्तीय स्थिरता पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती होगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए जल शुल्क निर्धारण, रखरखाव बजट और भविष्य में आवश्यक बजटीय प्रावधानों के अनुसार वाटर मीटर लगाने की संभावना पर भी विचार किया गया। अधिकारियों का मानना है कि इससे जल की अनावश्यक बर्बादी कम होगी और योजनाओं के संचालन के लिए आवश्यक राजस्व भी उपलब्ध हो सकेगा।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार की स्वीकृति और आगामी नीति के अनुसार लिया जाएगा।
जल गुणवत्ता और मॉनिटरिंग व्यवस्था होगी मजबूत
बैठक में पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने जल गुणवत्ता परीक्षण, नियमित निरीक्षण, विभिन्न स्तरों पर निगरानी व्यवस्था, अनुपालन प्रणाली तथा सामुदायिक भागीदारी आधारित मूल्यांकन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल पानी की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनी रहे।
जल जीवन मिशन 2.0 की नीति का प्रस्तुतिकरण
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित संचालन एवं रखरखाव नीति का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने बताया कि नई नीति का उद्देश्य योजनाओं को दीर्घकाल तक सफल बनाए रखना, स्थानीय संस्थाओं को सशक्त करना और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित जल जीवन मिशन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने सुझाव साझा किए।
ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम पहल
राज्य सरकार का यह प्रयास केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण पेयजल योजनाओं को आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक रूप से सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत और प्रभावी हो सकती है।
