छत्तीसगढ़ म कोयला, लोहा, बॉक्साइट, टिन अउ डोलोमाइट जइसने भरपूर खनिज संपदा हवय। जानव राज्य के खनिज भंडार, अर्थव्यवस्था म योगदान, चुनौती, ग्रीन माइनिंग, वैल्यू एडिशन अउ 2030 तक ‘मिनरल पावर हाउस’ बने के रोडमैप के बारे म विस्तार ले।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । छत्तीसगढ़ ला अक्सर “धान के कटोरा” कहे जाथे, फेर ए राज्य के पहचान सिरिफ खेती तक सीमित नई हे। धरती के नीचे छुपे अपार खनिज संपदा के कारण छत्तीसगढ़ आज देश के सबसे समृद्ध खनिज राज्य मन म गिने जाथे। कोयला, लोहा, बॉक्साइट, टिन, डोलोमाइट, चूना पत्थर अउ ग्रेनाइट जइसने बहुमूल्य खनिज राज्य के अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार बन गे हवंय।
आज जब छत्तीसगढ़ अपन 25 बछर के सफर पूरा करे के ओर बढ़त हवय, त सरकार अउ उद्योग जगत के नजर सिरिफ खनिज निकाले तक नई, बल्कि वैल्यू एडिशन, ग्रीन माइनिंग, रोजगार सृजन अउ स्थानीय उद्योग विकास ऊपर घलो केंद्रित होवत दिखत हवय। विशेषज्ञ मन के मानना हे कि सही नीति अउ आधुनिक तकनीक के संग छत्तीसगढ़ 2030 तक भारत के सबसे बड़ा “मिनरल पावर हाउस” बने के क्षमता रखथे।
खनिज संपदा के मामले म देश के अग्रणी राज्य मन म एक
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार छत्तीसगढ़ म करीब 28 प्रकार के खनिज पाए जाथें, जेमां ले 18 खनिज के व्यावसायिक उत्पादन होवत हे।
राज्य के कोरबा, रायगढ़, सूरजपुर अउ मनेंद्रगढ़ जिला कोयला उत्पादन बर प्रसिद्ध हवंय। वहीं बस्तर, दुर्ग, राजनांदगांव अउ कबीरधाम लोहा अयस्क के बड़े केंद्र हवंय। सरगुजा, कोरबा अउ कबीरधाम बॉक्साइट उत्पादन म महत्वपूर्ण भूमिका निभाथें, जबकि दंतेवाड़ा देश के एकमात्र टिन उत्पादक क्षेत्र के रूप म पहिचान बनाए हवय।
डोलोमाइट उत्पादन म छत्तीसगढ़ देश म पहला स्थान रखथे, जबकि चूना पत्थर, संगमरमर अउ ग्रेनाइट के भंडार घलो राज्य ला औद्योगिक दृष्टि ले मजबूत बनाथें। बस्तर अउ देवभोग क्षेत्र म हीरा के संभावित भंडार ऊपर घलो लगातार सर्वे जारी हे।
राज्य के अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार आय खनिज क्षेत्र
छत्तीसगढ़ के अर्थव्यवस्था म खनिज क्षेत्र के योगदान बेहद महत्वपूर्ण माने जाथे। अनुमानित रूप ले राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) म खनिज क्षेत्र के करीब 12 प्रतिशत योगदान हवय, जबकि सरकारी राजस्व म ए हिस्सा लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंचथे।
ए खनिज संपदा के आधार ऊपर राज्य म इस्पात, एल्युमिनियम, सीमेंट अउ बिजली उत्पादन जइसने बड़े उद्योग विकसित होए हवंय। भिलाई इस्पात संयंत्र, बाल्को कोरबा, जिंदल, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक, एसीसी जइसने उद्योग राज्य के औद्योगिक पहचान ला मजबूत करथें।
प्रत्यक्ष अउ अप्रत्यक्ष रूप ले करीब 15 लाख लोग खनिज आधारित उद्योग मन ले रोजगार प्राप्त करत हवंय।
सिरिफ खनिज निकाले नई, अब वैल्यू एडिशन ऊपर जोर
विशेषज्ञ मन के मुताबिक वर्तमान म राज्य के अधिकांश खनिज कच्चा रूप म दूसर राज्य या विदेश भेजे जाथें। एखर कारण स्थानीय स्तर म मूल्य संवर्धन (Value Addition) के संभावना पूरा उपयोग नई हो पावत हे।
सरकार के लक्ष्य हवय कि आने वाला समय म राज्य म स्टील पाइप, ऑटो पार्ट्स, रेल सामग्री, एल्युमिनियम उत्पाद, ग्रीन सीमेंट अउ दूसर तैयार उत्पाद के निर्माण बढ़ाय जावय।
उदाहरण के रूप म, जऊन लोहा अयस्क कच्चा रूप म कम कीमत म बिकथे, ओही ले तैयार स्टील उत्पाद बनाके कई गुना अधिक मूल्य प्राप्त करे जा सकथे। ए तरीका ले राज्य म रोजगार, निवेश अउ उद्योग दूनों बढ़ सकथें।
ग्रीन माइनिंग बन सकथे भविष्य के पहचान
दुनिया भर म अब पर्यावरण संरक्षण ऊपर विशेष ध्यान देय जात हवय। ए कारण छत्तीसगढ़ म घलो ग्रीन माइनिंग के अवधारणा तेजी ले आगे बढ़त दिखत हे।
बंद खदान मन म सोलर ऊर्जा परियोजना विकसित करना, खनन के बाद पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण अउ आधुनिक तकनीक के उपयोग ऊपर जोर देय जात हवय।
अवैध खनन रोकाय बर ड्रोन सर्वे, डिजिटल निगरानी अउ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक के उपयोग घलो बढ़त हवय।
विशेषज्ञ मन के मानना हे कि आर्थिक विकास अउ पर्यावरण संरक्षण दूनों के बीच संतुलन बनाए रखना आने वाला समय के सबसे बड़ा चुनौती रहिही।
नई ऊर्जा अउ क्रिटिकल मिनरल ऊपर बढ़त हे ध्यान
दुनिया तेजी ले इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अउ स्वच्छ ऊर्जा के दिशा म आगे बढ़त हवय। ए कारण बॉक्साइट, ग्रेफाइट अउ दूसर महत्वपूर्ण खनिज मन के मांग लगातार बढ़त जात हवय।
कोरबा क्षेत्र म ग्रीन एल्युमिनियम उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा परियोजना अउ भविष्य म ग्रीन हाइड्रोजन जइसने संभावना ऊपर घलो काम होवत हवय। अगर ए योजना सफल होथें, त छत्तीसगढ़ देश के ऊर्जा परिवर्तन म महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकथे।
आदिवासी क्षेत्र म रोजगार अउ विकास के नई अवसर
राज्य के अधिकांश खनिज क्षेत्र अनुसूचित अउ आदिवासी इलाका म स्थित हवंय। ए कारण सरकार अब खनिज विकास के संग-संग स्थानीय रोजगार, कौशल विकास अउ सामाजिक विकास ऊपर घलो ध्यान देत हवय।
आईटीआई, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, मशीन ऑपरेटर प्रशिक्षण, भू-विज्ञान शिक्षा अउ स्थानीय उद्यमिता के माध्यम ले युवा मन बर रोजगार के अवसर बढ़ाय जाए के प्रयास जारी हें।
जिला खनिज न्यास (DMF) के माध्यम ले शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल अउ बुनियादी सुविधा के विकास ऊपर घलो लगातार निवेश करे जात हवय।
2030 तक के बड़ा लक्ष्य
राज्य सरकार के दीर्घकालीन सोच म खनिज उत्पादन बढ़ाय के संग-संग स्थानीय उद्योग विकास, निर्यात वृद्धि अउ हरित ऊर्जा विस्तार प्रमुख लक्ष्य म शामिल हवंय।
2030 तक खनिज उत्पादन म उल्लेखनीय बढ़ोतरी, वैल्यू एडिशन के हिस्सा लगभग दोगुना करे, लाखों रोजगार सृजित करे अउ नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाय के दिशा म काम करे के लक्ष्य तय करे गे हें।
अगर ए योजना सफलतापूर्वक लागू होथे, त छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख औद्योगिक अउ खनिज आधारित अर्थव्यवस्था म नई पहचान बना सकथे।
छत्तीसगढ़ के असली ताकत सिरिफ जमीन के नीचे दबे खनिज नई, बल्कि ओखर सही उपयोग, स्थानीय उद्योग, पर्यावरण संरक्षण अउ रोजगार सृजन म छिपे हवय।
आज जरूरत ए बात के हे कि राज्य कच्चा खनिज बेचे के बजाय तैयार उत्पाद बनाय, आधुनिक तकनीक अपनाय अउ ग्रीन माइनिंग के दिशा म तेजी ले आगे बढ़य। ए सोच सिरिफ राजस्व नई बढ़ाही, बल्कि लाखों युवा मन बर रोजगार, उद्योग अउ समृद्धि के नई राह घलो खोलही।
अगर सरकार, उद्योग अउ स्थानीय समाज मिलके ए दिशा म काम करथें, त 2030 तक छत्तीसगढ़ के “भारत के मिनरल पावर हाउस” बने के सपना हकीकत म बदल सकथे।
