रायपुर। छत्तीसगढ़ मं धर्मांतरण के मुद्दा एक बार फेर राजनीतिक अऊ सामाजिक बहस के केंद्र मं आ गे हे। प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय धर्म परिवर्तन के मुद्दा ऊपर बड़ा बयान देवत कहिन कि सिरिफ आदिवासी समाज नई, बल्कि साहू समाज सहित कई अन्य समुदाय मन मं घलो तेजी ले धर्म परिवर्तन होवत हे। उंकर ए बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक अऊ सामाजिक गलियारा मं चर्चा तेज होगे हे।
छत्तीसगढ़ मं बीते कई साल ले धर्मांतरण के मुद्दा समय-समय मं सुर्खी बनत रहिस। खासकर आदिवासी बहुल इलाका मन मं धर्म परिवर्तन के आरोप अऊ ओकर खिलाफ विरोध प्रदर्शन के घटना सामने आवत रहिथे। एही बीच नंदकुमार साय के बयान ला धर्मांतरण बहस के एक नवा अध्याय के रूप मं देखे जात हे।
धर्मांतरण ला लेके जताइस चिंता
नंदकुमार साय कहिन कि प्रदेश के कई इलाका मन मं सुनियोजित ढंग ले धर्म परिवर्तन कराय जावत हे। उंकर दावा हे कि ए प्रक्रिया सिरिफ आदिवासी समाज तक सीमित नई हे, बल्कि साहू समाज अऊ अन्य समुदाय मन मं घलो ए प्रकार के गतिविधि बढ़त दिखाई देत हे।
साय के अनुसार धर्म परिवर्तन के बढ़त घटना सामाजिक अऊ सांस्कृतिक दृष्टिकोण ले चिंता के विषय हे। उंकर कहना रहिस कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक संस्कृति, लोक परंपरा अऊ सामाजिक पहचान ला बचाय बर समाज के जागरूक होना जरूरी हे।
आदिवासी इलाका मं पहले घलो उठत रहिस मुद्दा
छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा अऊ जशपुर जइसने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मन मं धर्मांतरण के मुद्दा समय-समय मं चर्चा मं रहिस। कई सामाजिक संगठन अऊ स्थानीय समूह मन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठावत रहिन, जबकि दूसर पक्ष धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के बात करत रहिस।
धर्मांतरण के मुद्दा कई बार गांव स्तर मं विवाद के कारण घलो बनिस। कुछ इलाका मन मं सामाजिक तनाव के स्थिति बनिस, जेनकर बाद प्रशासन ला हस्तक्षेप करना पड़िस।
‘रास्ता रोके जाही’ – साय के चेतावनी
नंदकुमार साय अपन बयान मं साफ कहिन कि जेन मन धर्मांतरण कराय के काम मं शामिल होहीं, ओ मन के रास्ता रोके जाही। उंकर कहना रहिस कि समाज के लोगन ला अपन परंपरा, संस्कृति अऊ धार्मिक पहचान के संरक्षण बर आगे आना चाही।
साय के ए बयान ला कई लोग कड़ा संदेश के रूप मं देखत हें। हालांकि ए मुद्दा ऊपर अलग-अलग संगठन अऊ राजनीतिक दल मन के अपन-अपन विचार सामने आ सकत हे।
प्रदेश के राजनीति मं गरमाय सकथे बहस
राजनीतिक जानकार मन के मुताबिक नंदकुमार साय के ए बयान आगामी दिन मन मं प्रदेश के राजनीति मं घलो असर डाल सकथे। धर्मांतरण के मुद्दा छत्तीसगढ़ मं लंबे समय ले संवेदनशील विषय बने रहिस अऊ चुनावी राजनीति मं घलो ए मुद्दा कई बार उठत रहिस।
विशेषज्ञ मन मानथें कि धर्मांतरण जइसने विषय ऊपर चर्चा करत समय सामाजिक सौहार्द अऊ कानूनी व्यवस्था दुनों के ध्यान रखना जरूरी हे। भारत के संविधान हर नागरिक ला अपन धर्म मानय, पालन करय अऊ प्रचार करय के अधिकार देवत हे, वहीं कानून के दायरा मं रहिके किसी प्रकार के जबरन या प्रलोभन आधारित धर्म परिवर्तन ऊपर जांच अऊ कार्रवाई के प्रावधान घलो मौजूद हे।
सामाजिक संगठनों के प्रतिक्रिया ऊपर रहिही नजर
साय के बयान के बाद अब विभिन्न सामाजिक संगठन, धार्मिक समूह अऊ राजनीतिक दल मन के प्रतिक्रिया ऊपर सबके नजर टिकी हे। संभावना जताय जात हे कि आने वाला दिन मन मं ए मुद्दा ऊपर अउ चर्चा अऊ बयानबाजी देखे जा सकथे।
फिलहाल धर्मांतरण के विषय मं नंदकुमार साय के बयान प्रदेश मं चर्चा के प्रमुख विषय बन गे हे। आदिवासी समाज, साहू समाज अऊ अन्य समुदाय मन के बीच ए मुद्दा ऊपर अलग-अलग राय सामने आ सकत हे। अब देखना ए होही कि आने वाला समय मं ए विषय ऊपर शासन, प्रशासन अऊ समाज के विभिन्न वर्ग मन कइसे प्रतिक्रिया देवत हें।
छत्तीसगढ़ मं धर्मांतरण के बहस नवा नई हे, फेर नंदकुमार साय के ताजा बयान के बाद ए मुद्दा एक बार फेर प्रदेश के राजनीतिक अऊ सामाजिक विमर्श के केंद्र मं आ गे हे।
