कोरबा। कोरबा वन मंडल अंतर्गत कुदमुरा वन परिक्षेत्र के जिलगा परिसर में पिछले कई दिनों से विचरण कर रहा 13 हाथियों का दल आखिरकार मांड नदी पार कर वापस धरमजयगढ़ के जंगलों की ओर लौट गया है। हाथियों के क्षेत्र से बाहर निकलने की खबर मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली है। बीते दिनों हाथियों की लगातार मौजूदगी के कारण क्षेत्र के कई गांवों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ था।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हाथियों का यह दल दिनभर जंगलों के भीतर विश्राम करने के बाद शाम ढलते ही सक्रिय हुआ। कुदमुरा रेंज के विभिन्न हिस्सों में कुछ समय तक विचरण करने के पश्चात हाथियों ने मांड नदी को पार किया और धरमजयगढ़ वन क्षेत्र की ओर बढ़ गए। वन अमले ने हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी थी और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए निगरानी दल भी तैनात किए गए थे।
कई दिनों से दहशत में थे ग्रामीण
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से जिलगा और आसपास के गांवों में हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। क्षेत्र के अधिकांश किसानों के खेत जंगल से लगे हुए हैं या फिर जंगल के बीच स्थित हैं। ऐसे में खेती-किसानी, पशुपालन और दैनिक जरूरतों के लिए ग्रामीणों को सुबह-शाम घरों से बाहर निकलना पड़ता है।
हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए कई किसानों ने खेतों में जाना कम कर दिया था। ग्रामीणों को यह डर सताता रहा कि कहीं अचानक हाथियों का सामना न हो जाए। विशेष रूप से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अधिक चिंतित थे। हाथियों के वापस लौट जाने के बाद अब ग्रामीण धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या की ओर लौटने लगे हैं और खेतों में कामकाज भी शुरू हो गया है।
वन विभाग ने लगातार रखी निगरानी
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरे घटनाक्रम के दौरान सतर्कता बनाए रखी। हाथियों की लोकेशन ट्रैक करने के साथ-साथ आसपास के गांवों में मुनादी कर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई। विभागीय अमला लगातार ग्रामीणों के संपर्क में रहा और किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी करता रहा।
वन अधिकारियों का कहना है कि हाथियों का यह दल फिलहाल धरमजयगढ़ क्षेत्र की ओर लौट गया है, लेकिन वन्यजीवों की गतिविधियां लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए क्षेत्र के लोगों को अभी भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
खतरा पूरी तरह नहीं टला, जटगा रेंज में सक्रिय है 48 हाथियों का बड़ा दल
हालांकि 13 हाथियों के दल के क्षेत्र छोड़ने से स्थानीय लोगों को राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज में अभी भी 48 हाथियों का एक बड़ा दल लगातार विचरण कर रहा है।
वन विभाग के अनुसार यह बड़ा झुंड अधिकांश समय पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्रों में रहता है, जिससे मानव बस्तियों पर सीधा प्रभाव अपेक्षाकृत कम पड़ता है। लेकिन कई बार कुछ हाथी अपने मुख्य दल से अलग होकर नीचे गांवों और खेतों की ओर पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ मानव-हाथी संघर्ष की आशंका भी बढ़ जाती है।
ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल की ओर जाते समय विशेष सावधानी बरतें। यदि कहीं हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे या उनकी गतिविधियों के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल वन विभाग को सूचित करें। विभाग का कहना है कि समय रहते सूचना मिलने पर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के आगमन के साथ वन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही बढ़ जाती है। भोजन और पानी की तलाश में वे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र की ओर जाते रहते हैं। ऐसे समय में वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी होता है।
मानव-हाथी संघर्ष रोकना बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन और वन विभाग की प्राथमिकता है। कुदमुरा क्षेत्र से हाथियों का सुरक्षित रूप से बाहर निकल जाना राहत भरी खबर है, लेकिन जटगा रेंज में मौजूद बड़े झुंड को देखते हुए विभाग की निगरानी और सतर्कता आगे भी जारी रहेगी।
फिलहाल कुदमुरा और आसपास के गांवों में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है।
