बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘पहुना’ कार्यक्रम में क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने अपने राजनीतिक सफर, जनसंघ से जुड़े पारिवारिक संस्कार, भाजपा संगठन में संघर्ष, बिल्हा की बदलती राजनीति और क्रेडा की जनहितकारी योजनाओं पर खुलकर चर्चा की। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ संगठनकर्ता एवं छत्तीसगढ़ क्रेडा (CREDA) के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि राजनीति केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संगठन के प्रति समर्पण की लंबी साधना है। उन्होंने बताया कि राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा हर कार्यकर्ता के भीतर होती है, लेकिन किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान संगठन के प्रति उसकी निष्ठा, अनुशासन और निरंतर कार्य करने की क्षमता से बनती है।
रविवार को बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पारंपरिक संवाद कार्यक्रम ‘पहुना’ में शामिल हुए भूपेंद्र सवन्नी ने पत्रकारों और उपस्थित जनों के साथ अपने जीवन के कई अनसुने पहलुओं को साझा किया। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पारिवारिक राजनीतिक संस्कार, विद्यार्थी जीवन, भाजपा संगठन में शुरुआती संघर्ष, बिल्हा क्षेत्र की राजनीतिक यात्रा और वर्तमान में क्रेडा अध्यक्ष के रूप में निभाई जा रही जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
पिता से मिली राजनीति की पहली सीख
भूपेंद्र सवन्नी ने अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा श्रेय अपने दिवंगत पिता स्वर्गीय इन्द्रसेन सवन्नी को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता बिल्हा क्षेत्र में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और संगठन के विस्तार के लिए लगातार सक्रिय रहते थे।
उन्होंने कहा कि बचपन से घर का माहौल राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहा। जनसंघ और बाद में भाजपा के कार्यकर्ताओं का घर पर लगातार आना-जाना होता था। ऐसे माहौल ने उन्हें समाज और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी।
उनके अनुसार, राजनीतिक संस्कार किसी पुस्तक से नहीं, बल्कि परिवार और समाज के वातावरण से विकसित होते हैं। यही कारण रहा कि बचपन से ही संगठन के प्रति उनके मन में विशेष लगाव बना।
1987 से शुरू हुई सक्रिय राजनीतिक यात्रा
भूपेंद्र सवन्नी ने बताया कि वर्ष 1987 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह संगठन के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। हालांकि, विद्यार्थी जीवन के दौरान भी वे चुनावी गतिविधियों में जुड़े रहते थे।
उन्होंने याद करते हुए बताया कि उस समय चुनावों में उन्हें एजेंट जैसी जिम्मेदारियां दी जाती थीं। इससे चुनावी प्रक्रिया, बूथ प्रबंधन और संगठनात्मक कार्यप्रणाली को बहुत करीब से समझने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता के रूप में छोटे-छोटे दायित्व निभाते हुए जो अनुभव मिला, वही आगे चलकर बड़े संगठनात्मक दायित्वों को निभाने में सबसे अधिक उपयोगी साबित हुआ।
सरपंच चुनाव की जीत बनी राजनीतिक प्रेरणा
अपने शुरुआती राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए सवन्नी ने बताया कि उस समय बिल्हा क्षेत्र में पहली बार जनसंघ समर्थित उम्मीदवार सरपंच निर्वाचित हुआ था।
उस ऐतिहासिक जीत के बाद निकली विजय रैली ने उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्होंने कहा कि उसी क्षण उन्हें महसूस हुआ कि यदि संगठन के साथ ईमानदारी से काम किया जाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
यही वह दौर था जब उन्होंने स्वयं को पूरी तरह संगठनात्मक कार्यों के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।
‘संगठन तय करता है कार्यकर्ता की दिशा’
कार्यक्रम के दौरान जब उनसे राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर कार्यकर्ता के मन में आगे बढ़ने की इच्छा स्वाभाविक होती है, लेकिन भाजपा की कार्यशैली में अंतिम निर्णय संगठन का होता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा में व्यक्ति से अधिक संगठन महत्वपूर्ण है। किसी भी कार्यकर्ता को जो जिम्मेदारी दी जाती है, उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना ही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
उनके अनुसार संगठन में लगातार काम करने वाला कार्यकर्ता ही धीरे-धीरे नई जिम्मेदारियों तक पहुंचता है।
बिल्हा की राजनीति में आया बड़ा बदलाव
भूपेंद्र सवन्नी ने बिल्हा विधानसभा क्षेत्र की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब बिल्हा को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन समय के साथ संगठन की मेहनत, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के विश्वास ने इस क्षेत्र की राजनीतिक दिशा बदल दी।
आज बिल्हा भाजपा के मजबूत क्षेत्रों में गिना जाता है। उन्होंने इसका श्रेय हजारों कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत और जनता के विश्वास को दिया।
उनका कहना था कि राजनीतिक परिवर्तन अचानक नहीं आता, बल्कि यह लंबे समय तक लगातार किए गए जनसंपर्क, सेवा और संगठनात्मक कार्यों का परिणाम होता है।
क्रेडा के माध्यम से जनहित को प्राथमिकता
वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि प्रदेशभर में अक्षय ऊर्जा और सौर ऊर्जा से जुड़ी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सरकारी लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक ऊर्जा सुविधाएं पहुंचाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, यही उनकी प्राथमिकता है।
उनके अनुसार, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है।
कार्यकर्ता ही बने राजनीतिक गुरु
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब भूपेंद्र सवन्नी ने अपने राजनीतिक गुरुओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें राजनीति की प्रेरणा दी, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और संगठन ने उन्हें राजनीति का व्यवहारिक ज्ञान सिखाया।
उन्होंने कहा कि संगठन में वरिष्ठ नेताओं और अनुभवी कार्यकर्ताओं के साथ काम करते हुए उन्होंने अनुशासन, धैर्य, संवाद और जनसेवा की भावना सीखी।
उनका मानना है कि कोई भी नेता अकेले सफल नहीं हो सकता। उसके पीछे संगठन, कार्यकर्ताओं और समाज का सामूहिक सहयोग होता है।
पत्रकारों के सवालों का दिया बेबाक जवाब
‘पहुना’ कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने संगठन, सरकार, विकास कार्यों और राजनीतिक अनुभवों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका भूपेंद्र सवन्नी ने सहजता और स्पष्टता के साथ उत्तर दिया।
उन्होंने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए कहा कि संगठन में वर्षों तक बिना किसी अपेक्षा के कार्य करना ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही। यही अनुभव उन्हें आज भी नई जिम्मेदारियों को निभाने की ऊर्जा देता है।
युवा कार्यकर्ताओं को दिया संदेश
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं से राजनीति को केवल चुनाव या पद तक सीमित नहीं रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि युवा समाज सेवा, संगठन और राष्ट्र निर्माण की भावना से राजनीति में आते हैं तो वे लंबे समय तक लोगों का विश्वास जीत सकते हैं। संगठन के प्रति निष्ठा और निरंतर मेहनत ही किसी भी कार्यकर्ता की सबसे बड़ी पहचान होती है।
बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘पहुना’ कार्यक्रम में भूपेंद्र सवन्नी की बातचीत केवल उनके राजनीतिक जीवन का परिचय भर नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसे कार्यकर्ता की यात्रा थी जिसने जनसंघ की विचारधारा से मिले संस्कारों को भाजपा के संगठनात्मक विस्तार तक जीवंत रखा। पिता से मिली प्रेरणा, संगठन से मिला मार्गदर्शन और कार्यकर्ताओं के साथ वर्षों का जुड़ाव उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान बनकर सामने आया। साथ ही, क्रेडा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास और जनहित की योजनाओं को राजनीति से ऊपर उठकर लागू करना ही उनकी प्राथमिकता है।
