जांजगीर-चांपा जिले के सिलादेही और केरा के बीच स्थित हसदेव नदी पुल की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। पुल पर बड़े गड्ढे, बाहर निकली सरिया और क्षतिग्रस्त रेलिंग के कारण रोजाना हजारों वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत और सुरक्षा उपायों की मांग की है।
बिर्रा/जांजगीर-चांपा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)।जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा क्षेत्र में सिलादेही और केरा के मध्य हसदेव नदी पर बना पुल अब लोगों के लिए सुविधा से अधिक चिंता का कारण बनता जा रहा है। वर्षों पहले क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के उद्देश्य से बनाए गए इस महत्वपूर्ण पुल की स्थिति अब बेहद खराब हो चुकी है। पुल पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई सतह, बाहर निकलती सरिया और क्षतिग्रस्त रेलिंग न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका भी पैदा कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक इसकी समुचित मरम्मत कराने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाता दिखाई नहीं दे रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि गड्ढों में पानी भर जाने से उनका वास्तविक आकार दिखाई नहीं देता और वाहन चालक अनजाने में दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
कई जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग
हसदेव नदी पर बना यह पुल केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी मार्ग से जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर, बलौदा बाजार, सारंगढ़, महासमुंद और रायपुर सहित कई जिलों के बीच आवागमन होता है।
रोजाना इस पुल से हजारों दोपहिया, चारपहिया वाहन, यात्री बसें, मालवाहक ट्रक और अन्य भारी वाहन गुजरते हैं। क्षेत्र के व्यापार, कृषि परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों और दैनिक आवागमन के लिए यह पुल प्रमुख कड़ी बना हुआ है। ऐसे में इसकी जर्जर स्थिति लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
पुल पर बने गहरे गड्ढे बन रहे हादसों की वजह
पुल के कई हिस्सों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों के कारण वाहन चालकों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान इनमें पानी भर जाने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे विशेषकर बाइक सवार और छोटे वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ समय में कई वाहन इन गड्ढों की वजह से फिसल चुके हैं, जबकि कुछ वाहन पलटने की घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में लोगों की जान बच गई, लेकिन भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाहर निकल रही सरिया बढ़ा रही खतरा


पुल की ऊपरी सतह कई स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कंक्रीट टूटने के कारण लोहे की सरिया बाहर निकल आई है। इससे न केवल वाहनों के टायर क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है, बल्कि तेज गति से गुजरने वाले वाहनों के लिए भी यह गंभीर जोखिम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं कराई गई तो क्षति और बढ़ सकती है, जिससे भविष्य में यातायात बाधित होने की संभावना भी बन सकती है।
रेलिंग भी हुई क्षतिग्रस्त, बढ़ा दुर्घटना का जोखिम
पुल के दोनों किनारों पर लगी सुरक्षा रेलिंग भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। भारी वाहन चालक गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहनों को दाएं-बाएं मोड़ते हैं, जिससे रेलिंग से लगातार टक्कर होती रहती है।
रेलिंग टूटने या कमजोर होने के कारण पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा हो गया है। यदि किसी वाहन का संतुलन बिगड़ जाए तो गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों में बढ़ रही चिंता
सिलादेही, केरा और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति पिछले कई वर्षों से खराब होती जा रही है, लेकिन इसकी स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई। केवल छोटी-मोटी मरम्मत से समस्या का समाधान संभव नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन हजारों लोग इसी पुल से गुजरते हैं। स्कूल जाने वाले छात्र, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, किसान और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले वाहन भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में पुल की खराब स्थिति सीधे आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
भारी वाहनों का दबाव भी बना बड़ी वजह
स्थानीय लोगों का मानना है कि पुल से लगातार भारी मालवाहक ट्रकों और बड़े वाहनों के गुजरने के कारण इसकी सतह तेजी से खराब हुई है। यदि समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव किया जाता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जिन पुलों पर भारी यातायात का दबाव रहता है, उनकी नियमित जांच, संरचनात्मक परीक्षण और समय पर मरम्मत बेहद आवश्यक होती है।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
मानसून के दौरान पुल की समस्या कई गुना बढ़ जाती है। पानी भर जाने से गड्ढे दिखाई नहीं देते और चालक अनुमान के आधार पर वाहन निकालने को मजबूर होते हैं। रात के समय या कम रोशनी में यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है।
कई वाहन चालक बताते हैं कि पुल पार करते समय उन्हें वाहन की गति बेहद कम करनी पड़ती है, जिससे लंबा जाम भी लग जाता है। भारी वाहनों के आमने-सामने आने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन से मांग की है कि पुल का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। जहां आवश्यक हो वहां मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए और पुल पर सुरक्षा संकेतक, चेतावनी बोर्ड तथा अस्थायी बैरिकेडिंग भी लगाई जाए ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर होगी।
आवश्यक है समय रहते ठोस पहल
हसदेव नदी पर बना यह पुल केवल एक निर्माण संरचना नहीं बल्कि लाखों लोगों की आवाजाही का महत्वपूर्ण माध्यम है। क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं।
ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग पुल की वर्तमान स्थिति का विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन कर शीघ्र मरम्मत एवं आवश्यक सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू करे। इससे न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि क्षेत्र की यातायात व्यवस्था भी सुचारू बनी रहेगी।
