Korba News: कोरबा के बालको स्थित सतनाम नगर में 10 वर्षीय बच्ची की खेल-खेल में गमछे के फंदे से दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई। भाई को हंसाने के दौरान हुआ हादसा पूरे इलाके को गमगीन कर गया। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बालको क्षेत्र स्थित सतनाम नगर से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। महज 10 साल की एक मासूम बच्ची, जो कुछ ही पल पहले अपने छोटे भाई के साथ हंसते-खेलते समय मस्ती कर रही थी, देखते ही देखते हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गई। एक साधारण सा खेल, जो मासूम बच्चों के लिए सिर्फ मनोरंजन था, कुछ ही मिनटों में परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया।
इस हृदयविदारक हादसे के बाद पूरे मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ सिसकियां और चीख-पुकार सुनाई दे रही हैं। घटना ने हर माता-पिता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों के खेल भी कई बार कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं।
भाई को हंसाने के लिए करती थी ऐसा मजाक
परिजनों के अनुसार, मृत बच्ची रोमा (काल्पनिक नाम) तीसरी कक्षा की छात्रा थी। वह स्वभाव से बेहद चंचल, हंसमुख और अपने छोटे भाई से बेहद स्नेह करती थी। अक्सर वह अपने भाई का मनोरंजन करने के लिए तरह-तरह की हरकतें और मजाक किया करती थी।
बताया गया कि रोमा कई बार गमछे को ऊपर बांधकर उसमें सिर फंसाने का अभिनय करती थी ताकि उसका छोटा भाई हंस सके। परिवार के लोगों ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि उन्हें लगता था कि यह बच्चों का सामान्य खेल है।
लेकिन मंगलवार को यही खेल उसकी जिंदगी का आखिरी खेल बन गया।
कुछ ही सेकंड में हो गया दर्दनाक हादसा
जानकारी के मुताबिक, घटना के समय घर के अन्य सदस्य अपने-अपने काम में व्यस्त थे। इसी दौरान रोमा अपने छोटे भाई के साथ खेल रही थी। खेल-खेल में उसने पहले की तरह गमछा बांधा और उसमें सिर फंसाने की कोशिश की।
इस बार परिस्थितियां अलग थीं। खेल अचानक हादसे में बदल गया। गमछे का फंदा उसके गले में कस गया और वह खुद को छुड़ा नहीं सकी। कुछ ही देर में उसका दम घुटने लगा।
जब तक परिवार के लोगों की नजर उस पर पड़ी, तब तक वह बेसुध हो चुकी थी।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

घटना का पता चलते ही परिजन घबराकर रोमा को तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने तत्काल उसकी जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
डॉक्टरों के अनुसार, गले पर अधिक दबाव पड़ने और समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
यह खबर सुनते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि छोटा भाई अब भी पूरी तरह समझ नहीं पा रहा कि उसके साथ खेलने वाली बहन अब कभी वापस नहीं आएगी।
पूरे इलाके में पसरा मातम
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में परिवार के घर पहुंचने लगे। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, उसकी आंखें नम हो गईं। पड़ोसियों का कहना है कि रोमा बेहद मिलनसार और खुशमिजाज बच्ची थी। वह मोहल्ले के सभी बच्चों के साथ खेलती थी और हमेशा मुस्कुराती रहती थी।
किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक छोटी-सी लापरवाही इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी।
विशेषज्ञों की राय: बच्चों के खेल पर रखें नजर
बाल मनोवैज्ञानिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चे अक्सर टीवी, मोबाइल या आसपास देखी गई गतिविधियों की नकल करते हैं। उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि कौन-सी हरकत जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को निम्न बातों के बारे में समय रहते समझाएं—
- गले में रस्सी, गमछा, दुपट्टा या किसी भी कपड़े का फंदा बनाकर कभी खेल न करें।
- बच्चों को अकेले ऐसे खेल खेलने से रोकें जिनमें दम घुटने या गिरने का खतरा हो।
- घर के भीतर भी बच्चों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखें।
- बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित खेलों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दें।
- किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराएं।
एक हादसा, जो हमेशा याद दिलाएगा सतर्क रहने की जरूरत
रोमा की मौत सिर्फ एक परिवार का व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी सीख है। कई बार बच्चों के मासूम खेल अनजाने में जानलेवा रूप ले लेते हैं। ऐसे हादसे यह संदेश देते हैं कि बच्चों की सुरक्षा केवल बाहर नहीं, बल्कि घर के भीतर भी उतनी ही जरूरी है।
माता-पिता की थोड़ी-सी जागरूकता और बच्चों को समय रहते दी गई सही जानकारी भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जिस घर में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहां अब गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। परिजनों का कहना है कि उन्हें आज भी यकीन नहीं हो रहा कि उनकी बेटी इतनी जल्दी उनसे दूर चली जाएगी। मोहल्ले के लोग भी परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है।
यह दर्दनाक घटना हर अभिभावक के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की मासूम शरारतों और खेलों को भी गंभीरता से समझना आवश्यक है। कई बार एक छोटा-सा मजाक जिंदगी भर का दर्द बन जाता है।
