रायपुर के लोक भवन से ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ हुआ। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में युवाओं ने नशामुक्त भारत का संकल्प लिया। जानिए 100 सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य, कार्यक्रम और इसकी पूरी रणनीति।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। देश को नशामुक्त बनाने और युवाओं को सकारात्मक सोच एवं जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित लोक भवन में ‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से पहुंचे युवा, छात्र-छात्राएं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनएसएस, एनसीसी, माय भारत युवा संगठन तथा विभिन्न युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया।
यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक व्यापक जनआंदोलन बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से दूर रखते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिल सके।
100 सप्ताह तक चलेगा व्यापक जनजागरूकता अभियान
‘नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत 2 अगस्त 2026 से हुई है और यह अभियान अगले 100 सप्ताह तक देशभर में चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जाएगा। इस दौरान शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक लाखों युवाओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
अभियान के तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), माय भारत युवा संगठन तथा अन्य सामाजिक एवं युवा संगठनों के सहयोग से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि यदि युवाओं को सही समय पर सही दिशा और सकारात्मक वातावरण मिले तो वे स्वयं भी नशे से दूर रहेंगे और समाज को भी इसके दुष्प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
लोक भवन में युवाओं ने लिया नशामुक्त भारत का संकल्प

राजधानी रायपुर के लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ ली। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, ऊर्जा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से परिपूर्ण दिखाई दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून के भरोसे नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक जरूरी है।
अभियान में होंगे विविध जनजागरूकता कार्यक्रम
अगले 100 सप्ताह तक विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से अनेक रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- नशामुक्ति शपथ कार्यक्रम
- जागरूकता रैलियां
- पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं
- निबंध एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताएं
- नुक्कड़ नाटक
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- लघु फिल्म प्रदर्शन
- सोशल मीडिया जनजागरूकता अभियान
- सामुदायिक संवाद एवं जनसंपर्क कार्यक्रम
- युवाओं के लिए प्रेरक कार्यशालाएं
इन गतिविधियों के माध्यम से न केवल विद्यार्थियों बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों को भी अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
युवाओं पर विशेष फोकस क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था और युवावस्था जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होता है। इस समय सही मार्गदर्शन मिलने पर युवा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं, जबकि गलत संगति और नशे की लत उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
इसी सोच के साथ इस अभियान में युवाओं को केवल जागरूक नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका भी दी जाएगी ताकि वे अपने विद्यालय, कॉलेज, गांव, मोहल्ले और समाज में नशामुक्ति के संदेशवाहक बन सकें।
सरकार का लक्ष्य है कि युवा स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बनें।
नशा केवल स्वास्थ्य नहीं, सामाजिक समस्या भी
विशेषज्ञों के अनुसार नशे की लत केवल व्यक्ति के शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। नशे के कारण घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाएं, अपराध, आर्थिक संकट, पढ़ाई में गिरावट और सामाजिक असुरक्षा जैसी अनेक समस्याएं बढ़ती हैं।
इसी कारण यह अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि शिक्षा, युवा, सामाजिक न्याय, पुलिस, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदायों को भी इसमें सहभागी बनाया गया है।
सोशल मीडिया भी बनेगा जागरूकता का बड़ा माध्यम
आज के दौर में युवाओं तक सबसे तेजी से पहुंचने वाला माध्यम सोशल मीडिया है। इसे ध्यान में रखते हुए अभियान के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
छोटे वीडियो, प्रेरक संदेश, जनजागरूकता पोस्ट, प्रतियोगिताएं और युवाओं की सकारात्मक कहानियों के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश देशभर तक पहुंचाने की योजना तैयार की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग किया जाए तो यह सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
विकसित भारत के सपने से जुड़ा है नशामुक्त युवा अभियान
सरकार का स्पष्ट मानना है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ होगा। नशे से मुक्त युवा ही शिक्षा, रोजगार, नवाचार, खेल, विज्ञान और उद्यमिता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
इसी सोच के साथ इस अभियान को केवल नशामुक्ति तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे विकसित भारत के व्यापक विजन से जोड़ा गया है, ताकि युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना और अधिक मजबूत हो।
समाज की भागीदारी होगी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं होती। परिवार, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्थाएं, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिक यदि मिलकर कार्य करें, तभी नशामुक्त समाज का सपना साकार हो सकता है।
लोक भवन से शुरू हुआ यह अभियान उसी सामूहिक भागीदारी का संदेश देता है, जिसमें हर नागरिक की जिम्मेदारी तय होती है। आने वाले 100 सप्ताह इस बात की परीक्षा भी होंगे कि समाज इस अभियान को किस स्तर तक जनआंदोलन का स्वरूप दे पाता है।
