छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, डीबीटी सहायता, आधुनिक खेती, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। जानिए कृषि मंत्री रामविचार नेताम की प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें और किसानों के लिए नई योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण।
रायपुर, 31 जुलाई 2026। (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और राज्य की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती तथा इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। ऐसे में किसानों को बेहतर संसाधन, आधुनिक तकनीक और समय पर सरकारी सहायता उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार व्यापक कदम उठा रही है।
राजधानी रायपुर में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभाग की उपलब्धियों, वर्तमान तैयारियों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कृषि को आधुनिक तकनीक, विविधीकरण और मूल्य संवर्धन से जोड़कर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।
किसानों के लिए खाद और बीज की पर्याप्त व्यवस्था
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि खरीफ सीजन को देखते हुए राज्य में उर्वरकों और गुणवत्तापूर्ण बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। विभाग के अनुसार राज्य में उर्वरकों का लगभग 98 प्रतिशत भंडारण सुनिश्चित किया जा चुका है ताकि किसानों को बोनी और फसल प्रबंधन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सरकार का प्रयास है कि हर किसान को समय पर खाद और प्रमाणित बीज उपलब्ध हों, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़े और फसल की गुणवत्ता में सुधार हो। अधिकारियों ने कहा कि वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी जिले में कृत्रिम कमी या कालाबाजारी जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।
डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ
राज्य सरकार ने किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था को मजबूत किया है। इसके माध्यम से किसानों के बैंक खातों में सीधे राशि पहुंचाई जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हुई है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली से किसानों को समय पर सहायता मिलने के साथ-साथ योजनाओं का लाभ भी तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। इससे खेती के लिए आवश्यक निवेश करना किसानों के लिए पहले की तुलना में आसान हुआ है।
आधुनिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और कृषि को आधुनिक एवं टिकाऊ बनाना है।
उन्होंने बताया कि कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर किसानों की श्रम लागत कम करने का प्रयास किया जा रहा है। आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से कम समय में अधिक कार्य संभव हो रहा है, जिससे उत्पादकता में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
सरकार प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को भी प्रोत्साहित कर रही है ताकि खेती पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ दीर्घकालिक रूप से लाभकारी भी बन सके।
सिंचाई सुविधाओं का विस्तार बना प्राथमिकता
कृषि उत्पादन बढ़ाने में सिंचाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने पर लगातार काम कर रही है। जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई के बेहतर साधनों से वर्षा पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आय अधिक स्थिर बन सकेगी।
कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन पर भी फोकस
राज्य सरकार अब कृषि को केवल धान उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती। किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करने के लिए उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
फल एवं सब्जी उत्पादन, डेयरी गतिविधियों, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विविधीकरण ही भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था का आधार बनेगा।
कृषि अधोसंरचना के विकास पर तेजी से काम
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने बताया कि कृषि अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसमें भंडारण क्षमता बढ़ाने, कृषि मंडियों को बेहतर बनाने, प्रसंस्करण इकाइयों के विकास तथा किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने जैसे प्रयास शामिल हैं।
इस दिशा में कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसानों तक नई तकनीक और उन्नत कृषि पद्धतियों को पहुंचाने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों और संस्थानों की रही महत्वपूर्ण भागीदारी
इस अवसर पर कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, पशुधन विकास विभाग के अधिकारी चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, उद्यानिकी विभाग के संचालक लोकेश चंद्राकर, मत्स्य विभाग के संचालक एन.एस. नाग, छत्तीसगढ़ राज्य मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेन्द्र सवन्नी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल तथा महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनित सक्सेना भी उपस्थित रहे।
इन अधिकारियों ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति तथा भविष्य की कार्ययोजना पर भी विस्तार से जानकारी दी।
किसानों की आय बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की कुल आय में स्थायी वृद्धि करना है। इसके लिए खेती को आधुनिक तकनीक, बाजार, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए कृषि के साथ पशुपालन, बागवानी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ते हैं तो उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। सरकार इसी सोच के साथ योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कर रही है।
आने वाले समय में और मजबूत होगी कृषि व्यवस्था
राज्य सरकार का मानना है कि कृषि क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का लाभ आने वाले वर्षों में और अधिक दिखाई देगा। समय पर खाद-बीज की उपलब्धता, डिजिटल सहायता, आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई विस्तार, कृषि यंत्रीकरण और कृषि विविधीकरण जैसे कदम छत्तीसगढ़ के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा तो छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन के साथ-साथ कृषि आधारित आय के मामले में भी देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
