रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । जब भारत के आजादी के लड़ई के बात होथे, त दिल्ली, झांसी, कानपुर अउ लखनऊ के नाम सबसे पहिली सामने आथे। फेर छत्तीसगढ़ के माटी घलो अइसने वीर सपूत मन ला जनम दे हवय, जेन मन अंग्रेज राज के खिलाफ डटके लड़िन अउ अपन प्रान के बलिदान देके आजादी के मशाल ला जलाए रखिन।
1854 ले 1947 तक छत्तीसगढ़ मं किसान, आदिवासी, जमींदार, समाज सुधारक अउ राजपरिवार के लोग मन एकजुट होके फिरंगी शासन के विरोध करिन। आजादी के 78 बछर बाद घलो ए मनखे मन के योगदान के चर्चा देशभर मं ओतका नइ होवय, जतेक होना चाही। ए समय जरूरत हवय कि नई पीढ़ी अपन माटी के इतिहास अउ बलिदान ला जाने।
वीर नारायण सिंह – छत्तीसगढ़ के पहिली महान क्रांतिकारी
सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह ला छत्तीसगढ़ के पहिली स्वतंत्रता सेनानी माने जाथे। 1856 के भयंकर अकाल मं जब गरीब जनता भूख ले तड़पत रहिस, तब वो अनाज गोदाम ले धान निकलवा के गरीब मन मं बंटवा दीस। अंग्रेज शासन ए काम ला अपराध बताइस अउ ओमन ला गिरफ्तार कर लिहिस।
1857 के क्रांति के दौरान वीर नारायण सिंह लगभग 500 लड़ाका मन संग अंग्रेज शासन के खिलाफ मोर्चा खोलिन। आखिरकार अंग्रेज मन ओला पकड़ लिहिन अउ 10 दिसंबर 1857 के रायपुर के जयस्तंभ चौक मं फांसी दे दीस। आज घलो ओमन छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान अउ बलिदान के प्रतीक माने जाथें।
गुण्डाधूर – बस्तर के जननायक
बस्तर के जनजातीय इतिहास मं गुण्डाधूर के नाम बड़े सम्मान ले लिहा जाथे। अंग्रेज शासन जंगल कानून लागू करके आदिवासी मन के जमीन, जंगल अउ परंपरागत अधिकार छीनत रहिस।
1910 के प्रसिद्ध भूमकाल आंदोलन के नेतृत्व गुण्डाधूर करिन। हजारों आदिवासी मन तीर-कमान, फरसा अउ पारंपरिक हथियार संग अंग्रेज शासन के खिलाफ खड़े होगे। कई महीना तक बस्तर मं अंग्रेज शासन कमजोर पड़गे। आज घलो बस्तर के लोकगीत मन मं गुण्डाधूर के बहादुरी गाए जाथे।
रानी अवंती बाई के संघर्ष के असर छत्तीसगढ़ तक
रानी अवंती बाई लोधी के मुख्य क्षेत्र भले मध्यप्रदेश रहिस, फेर ओमन के संघर्ष के असर लोरमी, मुंगेली अउ आसपास के इलाका तक देखे गीस। अंग्रेज शासन के खिलाफ कई लड़ई लड़के रानी अवंती बाई अपन अंतिम सांस तक देश बर संघर्ष करिन।
पंडित रविशंकर शुक्ल – राजनीतिक चेतना के अगुवा
छत्तीसगढ़ मं राष्ट्रीय आंदोलन ला मजबूत करे मं पंडित रविशंकर शुक्ल के योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहिस। महात्मा गांधी के नेतृत्व मं असहयोग आंदोलन मं शामिल होके कई बार जेल गइन।
रायपुर अउ दुर्ग क्षेत्र मं राष्ट्रीय चेतना जगाय, तिरंगा फहराय अउ जनता ला संगठित करे मं ओमन के अहम भूमिका रहिस। बाद मं वो मध्यप्रदेश के पहिली मुख्यमंत्री घलो बनिन।
ठाकुर प्यारेलाल सिंह – मजदूर अउ किसान मन के आवाज
बेमेतरा के ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़ के मजदूर अउ किसान आंदोलन के मजबूत नेता माने जाथें। मालगुजारी, बेगार अउ शोषण के खिलाफ वो लगातार आंदोलन चलाइन। भारत छोड़ो आंदोलन के समय घलो अंग्रेज शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाइन अउ जेल घलो गइन।
डॉ. ई. राघवेन्द्र राव के शिक्षा आंदोलन
डॉ. ई. राघवेन्द्र राव आदिवासी इलाका मं शिक्षा के अलख जगाइन। बस्तर अउ सरगुजा के दूर-दराज गांव मं शिक्षा पहुंचाय बर काम करिन। अंग्रेज शासन के विरोध के चलते ओमन ला गिरफ्तारी के सामना घलो करना परिस।
सतनामी समाज अउ महिला सेनानी मन के योगदान
स्वतंत्रता आंदोलन सिरिफ बड़े नेता मन तक सीमित नइ रहिस। सतनामी समाज ले हनुमान सिंह जइसने नेता मन सामाजिक न्याय अउ अंग्रेजी शासन दूनों के खिलाफ आवाज उठाइन।
ओही समय रायपुर के पद्मिनी देवी अउ बिलासपुर के लीलादेवी जइसने महिला सेनानी मन घलो आंदोलन मं बढ़-चढ़ के हिस्सा लिहिन। महिला सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन अउ जनजागरण मं ओमन के योगदान आज घलो प्रेरणा के स्रोत हवय।
1857 ले 1947 तक लगातार चलिस संघर्ष
छत्तीसगढ़ मं स्वतंत्रता आंदोलन अलग-अलग रूप मं चलत रहिस। 1857 के विद्रोह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन अउ 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन मं प्रदेश के हजारों लोग शामिल होइन।
अंग्रेज शासन अकाल के समय घलो लगान वसूलत रहिस, जंगल कानून लागू करके आदिवासी मन के अधिकार छीन दिस, बेगार कराइस अउ विरोध करे वाला मन ला जेल, फांसी अउ काला पानी जइसने सजा दीस।
आज घलो जिंदा हवय ओमन के विरासत
आज रायपुर के वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, जगदलपुर के गुण्डाधूर स्टेडियम, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय अउ कई स्मारक ए महान सेनानी मन के याद ला जिंदा रखे हवयं।
राज्य सरकार घलो समय-समय मं स्वतंत्रता सेनानी मन के सम्मान बर अलग-अलग पहल करत हवय, ताकि नई पीढ़ी अपन इतिहास ला जान सके।
नई पीढ़ी बर संदेश
आज के युवा पीढ़ी बर जरूरी हवय कि वो अपन इतिहास ला जाने। आजादी सिरिफ एक तारीख नइ, बल्कि लाखों बलिदान के परिणाम आय। वीर नारायण सिंह, गुण्डाधूर, ठाकुर प्यारेलाल सिंह अउ अइसने अनेक सेनानी मन अपन सुख-सुविधा त्याग के देश बर लड़िन।
आज जरूरत हवय कि हर गांव, हर स्कूल अउ हर परिवार मं ए महान सपूत मन के कहानी सुनाय जावय, ताकि नई पीढ़ी अपन माटी ऊपर गर्व कर सके।
छत्तीसगढ़ सिरिफ धान के कटोरा नइ, बल्कि बलिदान के धरती घलो आय। ए माटी के वीर सपूत मन आजादी बर जेन संघर्ष करिन, ओला भुलाना इतिहास संग अन्याय होही। आजादी के असली कीमत ओमन के बलिदान ले समझ मं आथे।
